गुमला जिले के घाघरा प्रखंड में सड़क निर्माण की मांग को लेकर हिंडाल्को के विरुद्ध चल रहा ग्रामीणों का आंदोलन मंगलवार को नौवें दिन भी जारी रहा। करम पर्व के बावजूद सैकड़ों आंदोलनकारी धरनास्थल पर डटे रहे और वहीं पारंपरिक तरीके से पर्व मनाया।
करम पूजा के लिए बड़ी संख्या में महिलाएं और अन्य ग्रामीण पारंपरिक वेशभूषा में आंदोलनस्थल पहुंचे। वहां करम डाली स्थापित कर रीति-रिवाज के अनुसार पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद ढोल-नगाड़ों की थाप पर पारंपरिक गीत और नृत्य का आयोजन हुआ।
पर्व में शामिल कई महिलाएं अपने घरों से पारंपरिक पकवान बनाकर लाई थीं। पूजा के बाद आंदोलनकारियों ने मिलकर इन पकवानों का आनंद लिया। इस दौरान धरनास्थल पर सड़क की मांग को लेकर संघर्ष और करम पर्व का उत्साह एक साथ दिखाई दिया।
आंदोलन से जुड़े सूरज नायक के अनुसार, मांग पूरी होने तक ग्रामीण धरनास्थल छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि आंदोलन के बीच अपनी परंपरा, संस्कृति और सभ्यता को जीवंत रखने के उद्देश्य से धरनास्थल पर ही करम पर्व मनाने का निर्णय लिया गया।
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि पर्व का आयोजन होने के बाद भी सड़क निर्माण की उनकी मांग और आंदोलन जारी रहेगा। आंदोलनकारी नौ दिनों से संबंधित कंपनी के विरुद्ध धरना दे रहे हैं। उपलब्ध विवरण में प्रस्तावित सड़क की लंबाई, निर्माण की समयसीमा या कंपनी और प्रशासन के किसी ताजा निर्णय की जानकारी नहीं दी गई है।
करम पर्व झारखंड की प्रमुख सामुदायिक परंपराओं में शामिल है। घाघरा के आंदोलनकारियों ने इस अवसर को धरना समाप्त करने के बजाय सामूहिक पूजा के साथ मनाया और अपनी मांग पर बने रहने की बात दोहराई। इस तरह धरनास्थल मंगलवार को विरोध के साथ सांस्कृतिक आयोजन का केंद्र भी बना रहा।