पूर्वी सिंहभूम के घाटशिला में साहित्यकार विभूति भूषण बंदोपाध्याय की जयंती पर आयोजित दो दिवसीय उत्सव के दूसरे दिन रविवार शाम सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। कॉलेज रोड स्थित विभूति संस्कृति मंच परिसर में नृत्य, संगीत और नाटक की प्रस्तुतियों के बीच कार्यक्रम देर रात तक चला। आयोजन की अध्यक्षता विभूति स्मृति संसद कमेटी के अध्यक्ष देवी प्रसाद मुखर्जी ने की।
कार्यक्रम का उद्घाटन विधायक सोमेश चंद्र सोरेन ने किया। उन्होंने घाटशिला विधानसभा क्षेत्र में बांग्ला भाषा के व्यापक उपयोग का उल्लेख करते हुए इसकी पढ़ाई को बढ़ावा देने और बांग्ला अकादमी के गठन की आवश्यकता बताई। उन्होंने भाषा और संस्कृति के संरक्षण के लिए समाज के सभी वर्गों से साझा प्रयास करने की अपील भी की।
विधायक ने विभूति भूषण बंदोपाध्याय के घाटशिला से जुड़ाव को भी रेखांकित किया। उनके अनुसार, साहित्यकार ने क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता और धारागिरी तथा फूलडुंगरी पहाड़ जैसे स्थानों को अपनी रचनाओं में जगह दी थी। उन्होंने घाटशिला की पर्यटन पहचान को मजबूत करने के लिए सामूहिक प्रयास की जरूरत बताई।
सांस्कृतिक संध्या में झाड़ग्राम की प्रयास संस्था ने बांग्ला नाटक ‘दिल दरिया’ प्रस्तुत किया। इसका निर्देशन प्रदीप चक्रवर्ती ने किया। इसके बाद जमशेदपुर के मो. निजाम के निर्देशन में हिंदी नाटक ‘पक्षी’ का मंचन हुआ। मनोज मित्र द्वारा लिखित इस नाटक की प्रस्तुति को दर्शकों ने सराहा।
कमेटी के अध्यक्ष देवी प्रसाद मुखर्जी ने बताया कि बंगाल की साहित्यिक और सांस्कृतिक परंपरा को जीवित रखने के उद्देश्य से ऐसे कार्यक्रम वर्षों से आयोजित किए जा रहे हैं। संध्या में नाट्य प्रस्तुतियों के साथ नृत्य और संगीत ने भी आयोजन को विविधता दी।
कार्यक्रम का संचालन अनूप दत्ता ने किया। आयोजन में स्थानीय जनप्रतिनिधि, विभिन्न समितियों के पदाधिकारी, राजनीतिक कार्यकर्ता और संस्कृति से जुड़े लोग उपस्थित रहे। दो दिवसीय उत्सव का दूसरा दिन साहित्यकार की स्मृति के साथ घाटशिला की भाषायी और सांस्कृतिक विरासत पर केंद्रित रहा।