रांची में आपदा प्रबंधन विभाग ने चक्रवात अर्णब के प्रभाव को देखते हुए झारखंड के सभी जिलों को सतर्क रहने का निर्देश दिया है। आपदा प्रबंधन मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने उपायुक्तों से धान की फसल को हुए नुकसान का तत्काल स्थलीय सर्वे कराने को कहा है। सर्वे के आधार पर प्रभावित किसानों को निर्धारित प्रावधानों के अनुसार मुआवजा और राहत उपलब्ध कराई जाएगी।
उपायुक्तों को भेजे गए निर्देश में कृषि भूमि और तैयार धान की वास्तविक क्षति का व्यापक आकलन करने को कहा गया है। विभाग का जोर सर्वे प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी रखने पर है, ताकि नुकसान झेलने वाले किसानों की पहचान कर उन्हें नियमानुसार सहायता दी जा सके। मंत्री ने सर्वे में लापरवाही या केवल औपचारिकता पूरी करने से बचने की हिदायत भी दी है।
चक्रवाती परिस्थितियों के बीच स्वास्थ्य सेवाओं को भी अलर्ट पर रखा गया है। सभी जिलों के सिविल सर्जनों को सदर और अनुमंडल अस्पतालों के साथ सामुदायिक तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश मिला है। प्रत्येक सदर अस्पताल में कम से कम 10 अतिरिक्त बेड तैयार रखने को कहा गया है।
अस्पतालों में आवश्यक दवाएं, जीवनरक्षक औषधियां, ऑक्सीजन, एंबुलेंस और चिकित्सा उपकरण उपलब्ध रखने के निर्देश दिए गए हैं। चिकित्सकों तथा स्वास्थ्यकर्मियों की पर्याप्त तैनाती के साथ वज्रपात, सर्पदंश और बारिश से होने वाली बीमारियों से निपटने की विशेष तैयारी रखने को भी कहा गया है।
प्रशासन को जलजमाव वाले संवेदनशील क्षेत्रों, निचले इलाकों और नदी-नालों के आसपास निगरानी बढ़ाने को कहा गया है। जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने तथा राहत और बचाव कार्यों के लिए संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने का निर्देश दिया गया है।
राज्य सरकार ने संबंधित विभागीय अधिकारियों से हर परिस्थिति के लिए तैयार रहने और आपदा प्रबंधन की व्यवस्थाएं दुरुस्त रखने को कहा है। फसल क्षति के सर्वे के बाद ही प्रभावित क्षेत्र और नुकसान का विस्तृत आकलन सामने आएगा। इसके आधार पर किसानों को लागू सरकारी नियमों के तहत क्षतिपूर्ति देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।