थानों में सीसीटीवी लगाने में देरी पर झारखंड हाईकोर्ट सख्त, अधिकारी फिर तलब

झारखंड के 606 थानों में 8,854 सीसीटीवी कैमरे लगाने की परियोजना में देरी पर हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को फिर तलब किया है।

2 मिनट पढ़ें 6 बार पढ़ी गई
रांची स्थित झारखंड हाईकोर्ट का भवन

रांची में झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य के पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने की परियोजना आगे नहीं बढ़ने पर कड़ा रुख अपनाया है। प्रशासनिक और वित्तीय मंजूरी के बावजूद काम की धीमी गति को देखते हुए अदालत ने संबंधित अधिकारियों को एक बार फिर तलब किया है। हाईकोर्ट इस मामले में परियोजना की प्रगति और विलंब के कारणों पर लगातार जानकारी मांग रहा है।

परियोजना का उद्देश्य पुलिस थानों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के साथ आम नागरिकों के मानवाधिकारों की रक्षा और पुलिस की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत थाना परिसरों को नाइट विजन और ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग की क्षमता वाले कैमरों से कवर किया जाना है। हाईकोर्ट सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के आलोक में इसके क्रियान्वयन की निगरानी कर रहा है।

राज्य मंत्रिमंडल ने जनवरी में झारखंड के 606 थानों में कुल 8,854 कैमरे लगाने के लिए 134 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी थी। परियोजना लागू करने की जिम्मेदारी झारखंड एजेंसी फॉर प्रमोशन ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, यानी जैप-आईटी, को सौंपी गई है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, मंजूरी मिलने के बाद भी कैमरों की स्थापना पूरी नहीं हो सकी है।

परियोजना के लिए जैप-आईटी ने 7 फरवरी को पहली निविदा जारी की थी, लेकिन बाद में तकनीकी कारणों से उसे रद्द कर दिया गया। निविदा प्रक्रिया में तकनीकी बदलाव, इच्छुक कंपनियों के साथ हुई प्री-बिड बैठक के सुझाव और पारदर्शिता से जुड़े प्रावधान शामिल किए जाने थे। इसके बाद प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ने से कैमरे लगाने का काम अटका रहा।

सभी थानों में कैमरे लगाने के लिए झारखंड पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड ने 2 मार्च 2022 के विभागीय स्वीकृत्यादेश के तहत एक परामर्शदाता नियुक्त किया था। राज्य मंत्रिमंडल ने 27 अक्टूबर को परामर्शदाता के लंबित भुगतान के लिए 1,17,52,800 रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति भी दी। इसके बावजूद विभागों और कार्यान्वयन एजेंसी के स्तर पर परियोजना धरातल पर नहीं उतर पाई है।

अदालत की ताजा सख्ती के बाद अब संबंधित अधिकारियों को परियोजना की वास्तविक स्थिति और देरी के कारण स्पष्ट करने होंगे। मामला केवल उपकरणों की खरीद तक सीमित नहीं है; थानों में रिकॉर्डिंग व्यवस्था का प्रभावी संचालन भी सुरक्षा, जवाबदेही और पारदर्शिता से जुड़ा है। आगे की प्रगति निविदा प्रक्रिया और विभागीय समन्वय पर निर्भर करेगी।