चतरा जिले को रेल नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में प्रस्तावित परैया-चतरा और चतरा-पत्थलगडा नई रेल लाइन परियोजनाओं की मिट्टी जांच पूरी हो गई है। दोनों रेलखंडों की कुल प्रस्तावित लंबाई करीब 100.33 किलोमीटर है। परियोजनाएं आगे बढ़ने पर लंबे समय से सड़क परिवहन पर निर्भर जिले को नया रेल संपर्क मिल सकता है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, करीब 75.1 किलोमीटर लंबी परैया-चतरा रेल लाइन के लिए 3583.31 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति मिल चुकी है। दूसरी ओर, लगभग 25.23 किलोमीटर लंबी चतरा-पत्थलगडा लाइन की अनुमानित लागत 755.92 करोड़ रुपये बताई गई है। इसकी प्रशासनिक स्वीकृति की प्रक्रिया अंतिम चरण में होने की जानकारी दी गई है।
मिट्टी जांच के दौरान प्रस्तावित मार्ग में आने वाले नदी-नालों तथा ओवरब्रिज और अंडरपास के संभावित स्थानों पर विशेष परीक्षण किया गया। चतरा-पत्थलगडा रेलखंड के माध्यम से क्षेत्र को टोरी-शिवपुर रेल लाइन से जोड़ने की योजना है। हालांकि, निर्माण शुरू होने और रेल परिचालन की समयसीमा का स्पष्ट विवरण उपलब्ध नहीं है।
चतरा में अभी लंबी दूरी की आवाजाही के लिए लोगों की निर्भरता मुख्य रूप से सड़क मार्ग पर है। नई लाइन बनने से विद्यार्थियों, मरीजों, नौकरीपेशा लोगों और व्यापारियों को यात्रा का अतिरिक्त विकल्प मिल सकता है। जिले के टंडवा, सिमरिया, पत्थलगडा और गिद्धौर क्षेत्रों तक मौजूद रेल संपर्क का फिलहाल मुख्य उपयोग कोयला परिवहन में होने की बात कही गई है।
प्रस्तावित रेल संपर्क से कृषि उपज और अन्य सामान को बड़े बाजारों तक पहुंचाने के नए विकल्प खुलने की उम्मीद जताई गई है। इसके साथ औद्योगिक गतिविधियों और स्थानीय रोजगार को गति मिलने की संभावना भी बताई गई है। मां भद्रकाली मंदिर और कौलेश्वरी पर्वत जैसे पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होने पर जिले के पर्यटन कारोबार को भी लाभ मिल सकता है।
चतरा के सांसद कालीचरण सिंह के मुताबिक, दोनों परियोजनाओं की मिट्टी जांच हो चुकी है और निर्माण कार्य जल्द एक साथ शुरू होने की उम्मीद है। परियोजनाओं की अगली प्रगति अब शेष स्वीकृतियों और निर्माण संबंधी प्रक्रियाओं पर निर्भर करेगी। प्रस्ताव पूरा होने पर यह चतरा की वर्षों पुरानी रेल संपर्क की मांग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।