चाईबासा स्थित वन विभाग के प्रमंडलीय प्रशिक्षण संस्थान में वनकर्मियों को शाखा कटिंग के जरिए पौधे तैयार करने का प्रशिक्षण दिया गया। सत्र में ऐसे पेड़-पौधों के पुनर्जीवन पर ध्यान केंद्रित किया गया जिनके बीज उपलब्ध नहीं होते, बीज जुटाने में कठिनाई आती है या जिनकी प्रजाति के लुप्त होने का खतरा है।
प्रशिक्षक कमलेश्वर प्रसाद सिन्हा ने वन रक्षियों को बताया कि चयनित पौधों की शाखाओं की कटिंग से नए पौधे विकसित किए जा सकते हैं। प्रशिक्षण के दौरान इस पद्धति से नई पौध तैयार करने की तकनीकी प्रक्रिया की जानकारी दी गई, ताकि वनकर्मी इसे आधुनिक नर्सरी से जुड़े कार्यों में समझ और अपना सकें।
सत्र में बरगद के पेड़ का उदाहरण रखते हुए बताया गया कि कुछ पौधों को बीज की अपेक्षा शाखा कटिंग से बेहतर तरीके से तैयार किया जा सकता है। ऐसे पौधों को फाइकस प्रजाति के समूह में रखे जाने की जानकारी भी प्रतिभागियों को दी गई।
वनकर्मियों को यह भी समझाया गया कि जिन प्रजातियों के पौधे बीज से तैयार करने में परेशानी आती है, उनके लिए शाखा कतरन एक उपयोगी विकल्प हो सकती है। प्रशिक्षण का उद्देश्य कर्मियों को ऐसी वनस्पतियों के संवर्धन की व्यावहारिक जानकारी देना था, जिनकी नई पौध सामान्य बीज विधि से आसानी से नहीं मिल पाती।
कार्यक्रम में शाखा कटिंग के साथ टिशू कल्चर के माध्यम से पौधे तैयार करने की तकनीक पर भी जानकारी दी गई। प्रशिक्षण संस्थान में मौजूद वनकर्मियों को दोनों विधियों के उपयोग और पौध तैयार करने में उनकी भूमिका से अवगत कराया गया।
यह प्रशिक्षण वन नर्सरी और पौध संरक्षण से जुड़े काम में तकनीकी समझ बढ़ाने पर केंद्रित रहा। खास तौर पर कम उपलब्ध या कठिनाई से विकसित होने वाली प्रजातियों के लिए वैकल्पिक पौध-प्रवर्धन विधियों की जानकारी वनकर्मियों के मैदानी काम में उपयोगी हो सकती है।