चाकुलिया गौशाला में बन रहे 50 हजार गोबर के दीये, पांच हजार अयोध्या भेजने की तैयारी

चाकुलिया गौशाला में गोबर और मिट्टी से पर्यावरण अनुकूल दीये तैयार किए जा रहे हैं। दीपावली पर पांच हजार दीये अयोध्या भेजने की योजना है।

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पूर्वी सिंहभूम के चाकुलिया स्थित गौशाला में दीपावली के लिए गोबर और मिट्टी से पर्यावरण अनुकूल दीये बनाए जा रहे हैं। इस वर्ष कुल 50 हजार दीये तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। इनमें से पांच हजार दीये अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर भेजने की तैयारी है, जहां दीपावली के अवसर पर इन्हें जलाया जाएगा।

गौशाला में दीये बनाने का काम तेजी से चल रहा है और इसमें स्थानीय महिलाएं जुटी हुई हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, महिलाओं को गौशाला में ही गोबर से दीये बनाने का प्रशिक्षण दिया गया है। मांग के हिसाब से अलग-अलग आकार और स्वरूप के आकर्षक दीये तैयार किए जा रहे हैं।

इन दीयों की बिक्री पांच रुपये प्रति पीस की दर से हो रही है। कई खरीदारों ने पहले से ऑर्डर भी दे रखे हैं। स्थानीय बाजार के साथ पटना, हैदराबाद, बेंगलुरु, मुंबई, दिल्ली और कोलकाता जैसे शहरों में भी चाकुलिया में बने दीये भेजे जाने की योजना है। तैयार दीयों को पहले कोलकाता पहुंचाया जाता है और वहां से अलग-अलग शहरों के लिए भेजा जाता है।

गोबर और मिट्टी से बने इन दीयों को पर्यावरण अनुकूल विकल्प के रूप में पेश किया जा रहा है। इनके बारे में बताया गया है कि एक बार तेल भरने के बाद दीया करीब ढाई घंटे तक जल सकता है। सामान्य दीयों की तुलना में इनमें तेल की खपत कम होने का भी दावा किया गया है।

दीया निर्माण से जुड़ी उर्मिला मुर्मू के अनुसार, प्रशिक्षण मिलने के बाद महिलाएं गौशाला में दीये बनाकर रोजगार कर रही हैं। उत्पादन की मात्रा पहले से मिले ऑर्डर और बाजार की मांग को ध्यान में रखकर तय की जा रही है। इससे त्योहार के लिए उत्पाद तैयार होने के साथ महिलाओं को आय का अवसर भी मिल रहा है।

दीपावली से पहले प्राकृतिक और पर्यावरण के अनुकूल उत्पादों में बढ़ती दिलचस्पी के बीच चाकुलिया के इन दीयों की पहुंच स्थानीय सीमा से बाहर बड़े शहरों तक बन रही है। निर्धारित लक्ष्य पूरा होने पर गौशाला से 50 हजार दीये बाजार और विभिन्न गंतव्यों के लिए उपलब्ध कराए जाएंगे।