जमशेदपुर के गोपाल मैदान में करम महोत्सव, लोकगीत-नृत्य के बीच प्रकृति संरक्षण का संदेश

बिष्टूपुर के गोपाल मैदान में आयोजित करम महोत्सव में पारंपरिक पूजा, झुमूर गीत और नृत्य प्रस्तुतियों के साथ सामाजिक एकजुटता एवं प्रकृति संरक्षण पर जोर दिया गया।

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जमशेदपुर के बिष्टूपुर स्थित गोपाल मैदान में कुड़मी सेना की ओर से करम महोत्सव आयोजित किया गया। समारोह में पारंपरिक पूजा, लोकगीत और नृत्य के माध्यम से कुड़मी समाज की सांस्कृतिक विरासत प्रस्तुत की गई। आयोजन में समाज के बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।

बिहार सरकार के ग्रामीण विकास एवं सूचना जनसंपर्क विभाग के मंत्री श्रवण कुमार मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में पहुंचे। उन्होंने करम डाल की पूजा करने के साथ पारंपरिक नृत्य में भी भाग लिया। विधायक सरयू राय भी महोत्सव में उपस्थित रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्रवण कुमार ने प्रकृति पूजा को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ा। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन की चुनौती के बीच प्रकृति के प्रति सम्मान जरूरी है। उनके अनुसार, झारखंड की परंपराएं सभ्यता और संस्कृति की रक्षा के साथ प्रकृति बचाने का संदेश देती हैं तथा ऐसे आयोजन सामाजिक संबंधों को मजबूत करते हैं।

महोत्सव के दौरान कुड़मी समाज को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने की मांग भी उठाई गई। कुड़मी सेना के केंद्रीय अध्यक्ष शैलेंद्र महतो ने कहा कि आयोजन का उद्देश्य समाज को सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से एकजुट करना है। उन्होंने केंद्र सरकार के समक्ष एसटी सूची में शामिल करने की मांग दोहराई।

सांस्कृतिक कार्यक्रम में ओडिशा से आईं गायिका सुलोचना देवी और उनकी टीम ने पारंपरिक झुमूर गीत प्रस्तुत किए। टीम के कलाकार गुलशन महंता, पोमी महंता, अमूल्य महाता, सुष्मिता बारिक और तापस बिंधानी ने नृत्य प्रस्तुतियों में भाग लिया। गीत-संगीत और सामूहिक नृत्य महोत्सव के प्रमुख आकर्षण रहे।

समारोह में पूर्वी सिंहभूम के समाजसेवी डॉ. सनत महतो उर्फ रतन महतो, चक्रधरपुर के श्याम सुंदर महतो और राजनगर के बसंत महतो को ‘कुड़मी रत्न’ देकर सम्मानित किया गया। आयोजकों के अनुसार, विशाल महतो, प्रबीर महतो, सूरज महतो, कार्तिक महतो और नीलांबर महतो ने कार्यक्रम के संचालन में सहयोग किया।