जमशेदपुर में ‘आगमनी 2026’ का आयोजन, गीत-संगीत और नृत्य से मां दुर्गा का स्वागत

झारखंड बंगभाषी समन्वय समिति के सांस्कृतिक कार्यक्रम में आगमनी गीत, नृत्य, कविता पाठ और गीतिनाट्य के माध्यम से बंगाली परंपरा की झलक प्रस्तुत की गई।

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जमशेदपुर में झारखंड बंगभाषी समन्वय समिति की ओर से ‘आगमनी 2026’ सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। समिति सभागार में हुए आयोजन में संगीत, नृत्य, कविता और गीतिनाट्य के माध्यम से मां दुर्गा का स्वागत किया गया। कार्यक्रम में बंगाली समाज की धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों की विविध झलक देखने को मिली।

आयोजन की शुरुआत मंगलदीप प्रज्वलन और मां दुर्गा के स्वागत से हुई। समिति के अध्यक्ष विकास मुखर्जी ने उपस्थित लोगों का स्वागत किया। मुख्य अतिथि भारत सेवाश्रम संघ के स्वामी मुक्तात्मानंद महाराज ने दुर्गापूजा के धार्मिक महत्व और बंगाली समाज में प्रचलित आगमनी गीतों की परंपरा पर अपने विचार रखे।

सुलेखा डे, पूर्वी चटर्जी, अरूप घोष और देवबाणी घोष ने आगमनी गीत प्रस्तुत किए। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से दुर्गापूजा से पहले मां दुर्गा के आगमन से जुड़ी भावनाओं को मंच पर अभिव्यक्त किया गया। पौलमी और उनकी टीम ने नृत्य पेश किया, जबकि अरुण दासगुप्ता ने कविता पाठ किया।

बाल कलाकार वैष्णवी दास की आगमनी नृत्य प्रस्तुति भी कार्यक्रम का हिस्सा रही। आयोजन का विशेष आकर्षण ‘मां आ रही हैं’ नामक गीतिनाट्य रहा। अरूप घोष और देवबाणी घोष ने इस प्रस्तुति में मां दुर्गा के धरती पर आगमन की खुशी तथा उससे जुड़ी भावनाओं को गीत और अभिनय के जरिए सामने रखा।

रिदम डांस अकादमी की श्रेया, पूरबी, आदलिन और खुशिका ने भी नृत्य प्रस्तुत किया। अलग-अलग आयु वर्ग के कलाकारों की भागीदारी से कार्यक्रम में गीत, नृत्य, कविता और नाट्य का समावेश हुआ। सभागार में मौजूद दर्शकों ने कलाकारों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देखीं।

कार्यक्रम में समिति की उपाध्यक्ष पूरबी घोष, परेश कुमार नंदी, नेपाल चंद्र दास और महासचिव संदीप सिन्हा चौधरी सहित समिति के सदस्य तथा अन्य लोग उपस्थित थे। समापन पर महासचिव संदीप सिन्हा चौधरी ने धन्यवाद ज्ञापन किया। आयोजन का केंद्र मां दुर्गा का स्वागत और बंगाली सांस्कृतिक परंपराओं की प्रस्तुति रहा।