जमशेदपुर के गोलमुरी क्लब में आयोजित बिहार-झारखंड एवं ईस्ट जोन प्लास्टिक सर्जन एसोसिएशन के 15वें राष्ट्रीय सम्मेलन में डर्मल इम्प्लांट और प्लास्टिक सर्जरी की उन्नत तकनीकों पर चर्चा हुई। दो दिवसीय आयोजन में देश के विभिन्न हिस्सों से आए करीब 90 चिकित्सकों ने भाग लिया और उपचार की नई विधियों से जुड़ी जानकारी साझा की।
सम्मेलन में विशेषज्ञों ने बताया कि जलने या कटने से हुए गहरे घावों के उपचार में डर्मल इम्प्लांट का इस्तेमाल किया जा सकता है। उनके अनुसार, इससे घाव भरने में लगने वाला समय कम हो सकता है और संक्रमण की आशंका भी घट सकती है। इसका उपयोग घाव पर दूसरी त्वचा चढ़ाने की सर्जरी से पहले किया जाता है।
आयोजन से जुड़े डॉ. ललित मिंज और डॉ. वीएसपी सिन्हा ने जानकारी दी कि यह सुविधा एमजीएम मेडिकल कॉलेज अस्पताल में उपलब्ध है। सम्मेलन में बताया गया कि पांच सेंटीमीटर लंबाई और इतनी ही चौड़ाई वाले डर्मल इम्प्लांट की कीमत 22 हजार से 27 हजार रुपये के बीच है।
कार्यक्रम में नाक की सर्जरी यानी राइनोप्लास्टी की नई तकनीकों पर भी विचार रखा गया। आयोजन सचिव डॉ. पंकज सिंगोदिया के अनुसार, ऐसी तकनीकों का उद्देश्य सर्जरी को बेहतर बनाना और चेहरे पर दिखाई देने वाले दाग को कम करना है। चेहरे के कैंसर के बाद पुनर्निर्माण, जलने से त्वचा के सिकुड़ने, फ्लैप सर्जरी और ट्रॉमा से संबंधित शोध पत्र भी प्रस्तुत किए गए।
सम्मेलन के दौरान आयोजित कार्यशाला में घाव या गड्ढे को भरकर चेहरे की संरचना सुधारने की विधियों पर जानकारी दी गई। शोध पत्र प्रस्तुत करने वालों में पटना की डॉ. परुमिता को पुरस्कृत किया गया। आयोजकों के मुताबिक, कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों और चिकित्सकों को नई तथा उन्नत चिकित्सा जानकारी से परिचित कराना था।
सम्मेलन के अंतिम दिन ईस्ट जोन की नई कार्यकारिणी का चुनाव भी हुआ। एम्स पटना की डॉ. वीणा सिंह अध्यक्ष और डॉ. प्रणव कुमार सचिव चुने गए। एम्स देवघर के डॉ. अभिषेक राय और मुजफ्फरपुर की डॉ. श्वेता को कार्यकारिणी के नए सदस्य के रूप में शामिल किया गया।