जमशेदपुर के होटल साहू नीलामी मामले में हाईकोर्ट का आदेश, तीन सप्ताह में कब्जा सौंपे बीएसएफसी

झारखंड हाईकोर्ट ने नीलामी के बाद खरीदार को संपत्ति का कब्जा नहीं देने के मामले में बीएसएफसी की 83.14 लाख रुपये की अतिरिक्त मांग रद्द कर दी।

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जमशेदपुर के होटल साहू नीलामी विवाद में झारखंड हाईकोर्ट का आदेश

झारखंड हाईकोर्ट ने जमशेदपुर स्थित होटल साहू की नीलाम संपत्ति का कब्जा खरीदार को नहीं सौंपे जाने के मामले में बिहार स्टेट फाइनेंशियल कॉरपोरेशन (बीएसएफसी) को तीन सप्ताह के भीतर कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति आनंद सेन की एकल पीठ ने बिमला डे की याचिका स्वीकार करते हुए निगम की ओर से 11 सितंबर 2019 को जारी 83,14,484 रुपये की मांग भी रद्द कर दी। आदेश 14 अक्टूबर को सुनाया गया।

मामले के अनुसार, होटल साहू नामक साझेदारी फर्म ने बीएसएफसी से वित्तीय सहायता लेने के दौरान अपनी संपत्ति गिरवी रखी थी। ऋण का भुगतान नहीं होने पर संपत्ति की नीलामी की गई। 27 अगस्त 2008 को याचिकाकर्ता के पति बिश्वनाथ चंद्र डे की 91 लाख रुपये की बोली सर्वाधिक स्वीकार्य पाई गई थी। उन्होंने बिक्री मूल्य का 25 प्रतिशत, यानी 22.75 लाख रुपये, जमा किया था।

ऋणकर्ता ने नीलामी को पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी, लेकिन 26 नवंबर 2015 को वह चुनौती खारिज हो गई। इसके बाद बीएसएफसी ने 29 अगस्त 2016 को नीलामी के पुराने आदेश को फिर मान्य किया। खरीदार ने निर्धारित रकम जमा की और 28 अक्टूबर 2016 को बिक्री तथा शेष ऋण भुगतान से संबंधित समझौता किया।

याचिका में कहा गया कि औपचारिकताएं पूरी होने के बावजूद संपत्ति का कब्जा नहीं मिला। जिला प्रशासन ने मजिस्ट्रेट और सशस्त्र बल की तैनाती का निर्देश दिया था, फिर भी 29 दिसंबर 2016 और 16 फरवरी 2017 को कब्जा दिलाने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। बाद में निगम ने खरीदार से 83 लाख रुपये से अधिक की अतिरिक्त मांग की, जिसे अदालत में चुनौती दी गई।

अदालत ने माना कि बिक्री प्रक्रिया आगे बढ़ाने और कब्जा दिलाने की जिम्मेदारी बीएसएफसी ने प्रभावी ढंग से पूरी नहीं की। संपत्ति का मूल्य बढ़ने के आधार पर अतिरिक्त रकम मांगने की दलील भी स्वीकार नहीं की गई। आदेश के मुताबिक, अपनी जिम्मेदारी निभाने में हुई विफलता का बोझ समझौते की शर्तें पूरी करने को तैयार खरीदार पर नहीं डाला जा सकता।

हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि दोनों पक्ष 28 अक्टूबर 2016 के समझौते की शर्तों से बंधे रहेंगे और उसमें तय अवधि की गणना 14 अक्टूबर 2026 से की जाएगी। संपत्ति में रह रहे किरायेदार अब याचिकाकर्ता के किरायेदार माने जाएंगे तथा किराया भी उन्हें ही देंगे। बीएसएफसी को नीलाम संपत्ति का कब्जा तीन सप्ताह में सौंपना होगा।