जमशेदपुर में करमा पूजा की तैयारी पूरी, 22 सितंबर को पारंपरिक विधि से होगा आयोजन

पूर्वी सिंहभूम के विभिन्न क्षेत्रों में करमा पूजा महोत्सव की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। जावा रोपण 16 सितंबर को होगा और 23 सितंबर को विसर्जन जुलूस निकलेगा।

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जमशेदपुर में करमा पूजा महोत्सव की तैयारियों की जानकारी देते आदिवासी उरांव समाज के प्रतिनिधि

जमशेदपुर में आदिवासी उरांव समाज ने करमा पूजा महोत्सव की तैयारियां पूरी कर ली हैं। समाज के प्रतिनिधियों ने पुराना सीतारामडेरा स्थित सरना भवन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कार्यक्रम की रूपरेखा साझा की। भादो एकादशी के अवसर पर 22 सितंबर को पूर्वी सिंहभूम सहित पूरे झारखंड में यह पर्व पारंपरिक रीति-रिवाज से मनाया जाएगा।

पूर्वी सिंहभूम में पुराना सीतारामडेरा, बिरसानगर, उलीडीह, शंकोसाई, बागबेड़ा, जादूगोड़ा और नूतनडीह में आयोजन की तैयारी की गई है। पूजा से जुड़ी गतिविधियां मुख्य पर्व से पहले शुरू हो जाएंगी और अगले दिन सामूहिक कार्यक्रम के साथ संपन्न होंगी।

कार्यक्रम के अनुसार, 16 सितंबर को अविवाहित युवक और युवतियां स्वर्णरेखा नदी से बालू लाकर जावा रोपण करेंगे। इसके बाद 21 सितंबर की शाम अलग-अलग करम अखाड़ों में कुंवारी युवतियों की ओर से जावा जागरण किया जाएगा।

मुख्य पूजा 22 सितंबर को होगी। दोपहर तीन बजे अविवाहित युवक करम राजा को आमंत्रित करेंगे। मांदर, ढोल और नगाड़ों के बीच करम डाल को पूजा स्थल तक लाया जाएगा तथा बस्ती में भ्रमण कराया जाएगा। इसके बाद पाहन विधिपूर्वक पूजा कर करम डाल को अखाड़े में स्थापित करेंगे।

रात आठ बजे करम कथा का आयोजन निर्धारित है। पूजा पूरी होने के बाद व्रत रखने वाले लोग अपना व्रत तोड़ेंगे। इसके बाद अखाड़ों में रातभर पारंपरिक नृत्य और गीत का कार्यक्रम चलेगा। महोत्सव के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में खेलकूद तथा सांस्कृतिक गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगी।

करम राजा का विसर्जन जुलूस 23 सितंबर को निकाला जाएगा। विसर्जन के बाद समाज के लोग परना मंडी में होने वाले सामूहिक भोज में शामिल होंगे। इस तरह जावा रोपण, जागरण, मुख्य पूजा, सांस्कृतिक कार्यक्रम और विसर्जन को मिलाकर महोत्सव का आयोजन कई चरणों में पूरा किया जाएगा।