जमशेदपुर में वायु गुणवत्ता की नियमित निगरानी अधूरी, आरटीआई जवाब में सामने आईं कमियां

प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के आरटीआई जवाब के अनुसार जमशेदपुर में वास्तविक समय एक्यूआई प्रदर्शन उपलब्ध नहीं है और पीएम 2.5 की नियमित जांच भी नहीं की जाती।

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जमशेदपुर में वायु गुणवत्ता की निगरानी से जुड़ी कई कमियां सूचना के अधिकार के तहत मिले जवाब में सामने आई हैं। झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने बताया है कि शहर में वायु गुणवत्ता सूचकांक का वास्तविक समय में प्रदर्शन करने वाली व्यवस्था नहीं है। हवा में मौजूद महीन प्रदूषक पीएम 2.5 की जांच भी नियमित रूप से नहीं की जाती।

पर्षद के जवाब के मुताबिक, शहर में बिष्टुपुर के गोपाल मैदान और गोलमुरी में वायु गुणवत्ता निगरानी के दो स्टेशन हैं। इन केंद्रों पर सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और पीएम 10 की मैनुअल निगरानी की जाती है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह निगरानी प्रतिदिन नहीं होती।

आरटीआई जवाब में कहा गया है कि पीएम 2.5 की जांच केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्देश पर केवल दिवाली के दौरान की जाती है। अप्रैल 2026 के कुछ उपलब्ध आंकड़ों में आरएसपीएम और टीएसपीएम का स्तर 200 से 350 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर के बीच दर्ज होने की जानकारी दी गई है।

पर्षद ने यह भी बताया कि वाहनों से निकलने वाले प्रदूषण, सड़क की धूल और औद्योगिक उत्सर्जन के अलग-अलग स्रोतों का विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन नहीं कराया गया है। बच्चों, बुजुर्गों और श्वसन संबंधी बीमारियों से प्रभावित लोगों पर प्रदूषण के असर का अलग आकलन भी उपलब्ध नहीं है।

झारखंड मानवाधिकार संगठन के चेयरमैन मनोज मिश्रा ने सात जुलाई 2026 को शहर की वायु गुणवत्ता से संबंधित सूचनाएं मांगी थीं। तीन अगस्त को मिले जवाब से असंतुष्ट होने के बाद उन्होंने 14 अगस्त को प्रथम अपील दायर की। इसके बाद पर्षद ने 30 सितंबर को विस्तृत उत्तर दिया।

मिश्रा ने नियमित निगरानी और वैज्ञानिक अध्ययन की कमी को जनस्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर विषय बताया है। उन्होंने इस मुद्दे पर आंदोलन शुरू करने और न्यायालय का रुख करने की घोषणा की है। फिलहाल उपलब्ध आरटीआई जानकारी शहर में निगरानी तंत्र के विस्तार और प्रदूषण स्रोतों के व्यवस्थित अध्ययन की आवश्यकता को रेखांकित करती है।