रांची: जल जीवन मिशन के तहत झारखंड को अगले तीन दिनों में 300 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है। नई दिल्ली के सुषमा स्वराज भवन में आयोजित केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के दो दिवसीय विभागीय शिखर सम्मेलन-2026 में केंद्र ने चार सितंबर तक यह राशि देने पर सहमति जताई। सम्मेलन में झारखंड के पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद और जल संसाधन मंत्री हफीजुल हसन शामिल हुए।
योगेंद्र प्रसाद ने सम्मेलन में राज्य की पेयजल जरूरतों और जल जीवन मिशन की वित्तीय स्थिति का विषय रखा। उन्होंने बताया कि मिशन के अंतर्गत झारखंड को 6,105 करोड़ रुपये मिलने हैं, जबकि फिलहाल 300 करोड़ रुपये जारी करने की सहमति बनी है। मंत्री ने केंद्र से बाकी राशि उपलब्ध कराने की भी मांग की।
राज्य सरकार ने खराब पड़े चापाकलों का मुद्दा भी सम्मेलन में उठाया। मंत्री के अनुसार, झारखंड में करीब डेढ़ लाख चापाकल खराब हैं। सरकार इन अनुपयोगी चापाकलों को रिचार्ज पिट के रूप में इस्तेमाल करने की योजना बना रही है और इस काम के लिए केंद्र से वित्तीय हिस्सेदारी मांगी गई है।
सम्मेलन में झारखंड में सतही जल की उपलब्धता पर भी चर्चा हुई। राज्य की ओर से कहा गया कि दामोदर नदी को छोड़कर सतही जल सीमित है, इसलिए पेयजल योजनाओं की रूपरेखा बनाते समय स्थानीय परिस्थितियों और जल उपलब्धता पर केंद्र को विचार करना चाहिए।
मंत्री ने ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक नल से पानी पहुंचाने वाली योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की जरूरत रखी। उन्होंने जल परियोजनाओं के लिए केंद्र और राज्य के बीच समन्वय, स्पष्ट निर्णय तथा समयबद्ध कार्ययोजना को आवश्यक बताया। राज्य ने जरूरी सहयोग उपलब्ध कराने का आग्रह भी किया।
दो दिवसीय सम्मेलन का शुभारंभ केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने किया। इसमें विभिन्न राज्यों के मंत्री और अधिकारी भाग ले रहे हैं। सम्मेलन के दूसरे दिन बुधवार को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में प्रस्तावित बैठक में भी झारखंड के मंत्री के शामिल होने की जानकारी दी गई है।