जहाजटांड़ की सड़क काटने और खनन नियमों के उल्लंघन के आरोप पर हाईकोर्ट में जनहित याचिका

धनबाद के जहाजटांड़ की सार्वजनिक सड़क काटे जाने और असुरक्षित खनन गतिविधियों के आरोपों को लेकर झारखंड हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है।

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धनबाद के जहाजटांड़ में सड़क से संबंधित जनहित याचिका का सांकेतिक दृश्य

धनबाद जिले के जहाजटांड़ बस्ती को जोड़ने वाली सार्वजनिक सड़क काटे जाने और खनन सुरक्षा मानकों के कथित उल्लंघन का मामला झारखंड हाईकोर्ट पहुंच गया है। जहाजटांड़ निवासी खेमलाल महतो ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत जनहित याचिका दायर की है। इसमें सड़क बहाल कराने, सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराने और पूरे प्रकरण की जांच की मांग की गई है।

याचिका के अनुसार, भौरा से जहाजटांड़ तक करीब 3.5 किलोमीटर लंबी सड़क ग्रामीण कार्य विभाग ने वर्ष 2015 में राज्य सरकार की योजना के तहत बनवाई थी। इसके निर्माण पर 1.65 करोड़ रुपये खर्च होने का उल्लेख है। याचिकाकर्ता का दावा है कि सड़क लगभग 10 हजार ग्रामीणों के आवागमन का प्रमुख साधन थी और इसे कानूनी प्रक्रिया के बिना काटा गया।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि 21 अगस्त 2026 की रात बीसीसीएल और उसकी आउटसोर्सिंग एजेंसी ने सड़क काट दी। दावा है कि इससे पहले ग्रामीणों को सूचना नहीं दी गई और कोई सरकारी आदेश भी नहीं था। घटना के बाद ग्रामीणों ने विरोध किया, कोयला ढुलाई कुछ दिनों तक प्रभावित रही तथा मौके पर पुलिस और सीआईएसएफ की तैनाती करनी पड़ी।

याचिकाकर्ता ने यह भी कहा है कि वर्ष 2019, 2020, 2021 और 2023 में अलग-अलग बैठकों तथा पत्रों के माध्यम से वैकल्पिक पक्की सड़क बनाने और मूल मार्ग बहाल करने का आश्वासन दिया गया था। याचिका के मुताबिक, इन आश्वासनों के बावजूद अब तक स्थायी समाधान नहीं निकला।

खनन सुरक्षा को लेकर याचिका में डीजीएमएस की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। इसमें दावा किया गया है कि वैकल्पिक सड़क के किनारे 30 मीटर से अधिक ऊंचा ओवरबर्डन डंप लगभग 90 डिग्री ढलान पर खड़ा है। याचिकाकर्ता ने इसे कोल माइंस रेगुलेशन-2017 के नियमों के विपरीत बताते हुए तत्काल तकनीकी निरीक्षण की मांग की है।

हाईकोर्ट से अनुरोध किया गया है कि सड़क तुरंत बहाल कराई जाए या सुरक्षित पक्की वैकल्पिक सड़क दी जाए। साथ ही डीजीएमएस, जिला खनन पदाधिकारी और ग्रामीण कार्य विभाग के अधिकारियों की स्वतंत्र समिति से समयबद्ध जांच कराने तथा उल्लंघन मिलने पर संबंधित खनन कार्य रोकने का निर्देश देने की प्रार्थना की गई है। ये सभी दावे फिलहाल याचिका में लगाए गए आरोप हैं; अदालत का निर्णय सामने नहीं आया है।