साहिबगंज सदर प्रखंड के बाढ़ प्रभावित महादेवगंज पीएसएस क्षेत्र में 11 केवी लाइन का फॉल्ट ठीक करने के लिए बिजली मिस्त्री अखिलेश कुमार को जोखिमपूर्ण तरीके से एक खंभे से दूसरे खंभे तक पहुंचना पड़ा। मरम्मत पूरी होने के बाद महादेवगंज सहित आसपास के प्रभावित इलाकों में बिजली आपूर्ति बहाल हो गई।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 11 केवी लाइन में खराबी आने के बाद पीएसएस से आपूर्ति चालू करने पर लाइन बार-बार ट्रिप कर रही थी। दिनभर तलाश के बाद मुफस्सिल थाना से आगे टाटा मोटर रिपेयरिंग सेंटर के पीछे फॉल्ट वाले स्थान की पहचान हुई। बाढ़ का पानी और मौके की परिस्थितियां मरम्मत दल के लिए बड़ी बाधा बनीं।
फॉल्ट वाली जगह तक पहुंचने के लिए नाव उपलब्ध नहीं थी। खंभों के नीचे पानी और घनी झाड़ियों के कारण जमीन से दूसरे खंभे पर चढ़ना भी सुरक्षित नहीं माना गया। इसके बाद हवा भरा ट्रक का टायर मंगाया गया और अखिलेश एक खंभे पर चढ़े। वहां से वह तार के सहारे लटकते हुए दूसरे खंभे तक पहुंचे और खराबी दूर की।
मरम्मत के दौरान पीएसएस से संबंधित लाइन की बिजली काट दी गई थी। लाइनमैन संतोष कुमार के मुताबिक, 11 केवी लाइन को पूरी तरह बंद कराने के बाद ही फॉल्ट ठीक किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि बिजली मिस्त्री को सुरक्षा किट उपलब्ध कराई गई है।
घटना की तस्वीर सामने आने के बाद कार्यस्थल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे हैं। तस्वीर में मिस्त्री तार से लटकता दिखाई देता है, जबकि दस्ताने, हेलमेट, सुरक्षा जूते और शरीर से बंधी सुरक्षा रस्सी जैसे उपकरण स्पष्ट रूप से नजर नहीं आते। ऐसे में बिजली आपूर्ति बहाल करने के साथ कर्मचारियों के लिए सुरक्षित पहुंच और मानक उपकरण सुनिश्चित करने की जरूरत भी सामने आई है।
बाढ़ के समय बिजली के खंभों तक पहुंचना, फॉल्ट खोजना और लाइन की मरम्मत करना सामान्य दिनों की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण होता है। महादेवगंज की घटना ने दिखाया कि आपात परिस्थितियों में नाव, उपयुक्त सुरक्षा साधन और सुरक्षित कार्यप्रणाली की उपलब्धता बिजली कर्मियों के लिए कितनी महत्वपूर्ण है।