जामताड़ा से संचालित बताए जा रहे एक साइबर ठगी नेटवर्क के सिलसिले में दिल्ली पुलिस की शाहदरा जिला साइबर थाना टीम ने धनबाद से दो युवकों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, दोनों पर बैंक अधिकारी बनकर लोगों से क्रेडिट कार्ड संबंधी गोपनीय जानकारी हासिल करने और उससे महंगे मोबाइल फोन खरीदने का आरोप है। गिरफ्तार युवक जामताड़ा जिले के बोरवा गांव के निवासी बताए गए हैं।
पुलिस ने आरोपियों की पहचान 24 वर्षीय आफताब अंसारी और 23 वर्षीय अब्दुल मजीद के रूप में की है। जांच अधिकारियों के मुताबिक, आफताब ने कंप्यूटर साइंस में बीटेक किया है, जबकि मजीद उसका सहयोगी बताया गया है। पुलिस का कहना है कि इस गतिविधि में कुछ अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं। दोनों से पूछताछ जारी है और गिरोह के कथित नेटवर्क की जांच की जा रही है।
मामले की जांच 23 सितंबर को दर्ज एक प्राथमिकी के बाद शुरू हुई थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि एक व्यक्ति ने बैंक अधिकारी बनकर केवाईसी अपडेट करने के बहाने उनके क्रेडिट कार्ड की जानकारी ले ली। इसके बाद कार्ड का इस्तेमाल कर 1.39 लाख रुपये मूल्य का फोन खरीदा गया। तकनीकी जांच में उस फोन की डिलीवरी धनबाद के झरिया इलाके में होने की जानकारी मिली।
इसके बाद साइबर थाना पुलिस की टीम धनबाद पहुंची और चार दिन तक अभियान चलाया। पुलिस के अनुसार, कुरियर डिलीवरी से जुड़ा जाल बिछाकर दोनों युवकों को उस समय पकड़ा गया, जब वे कथित पार्सल लेने पहुंचे। उनके पास से तीन मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। पुलिस का दावा है कि इन उपकरणों में मामले से संबंधित व्हाट्सएप बातचीत और अन्य डिजिटल सामग्री मिली है।
प्रारंभिक जांच के आधार पर पुलिस ने बताया कि सोशल मीडिया पर क्रेडिट कार्ड केवाईसी अपडेट से जुड़े विज्ञापन दिए जाते थे। प्रतिक्रिया देने वाले लोगों से ऑनलाइन फॉर्म भरवाया जाता और फिर वीडियो कॉल के दौरान स्क्रीन साझा करने के लिए कहा जाता था। आरोप है कि स्क्रीन पर दिखाई देने वाले कार्ड नंबर, सीवीवी और ओटीपी का उपयोग खरीदारी में किया जाता था। पुलिस के मुताबिक, खास तौर पर 50 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों को निशाना बनाया जाता था।
जांच एजेंसी को फिलहाल 50 से अधिक लोगों के साथ ठगी किए जाने के संकेत मिले हैं। पुलिस ने आशंका जताई है कि पीड़ितों की संख्या 150 से 200 तक हो सकती है और कुल रकम करोड़ों रुपये में हो सकती है, हालांकि इसकी पुष्टि अभी जांच के बाद ही होगी। खरीदे गए अधिकांश फोन नेपाल तथा कुछ अन्य राज्यों के स्थानीय बाजारों में कम कीमत पर बेचे जाने का दावा भी सामने आया है। आरोपों और बरामद डिजिटल सामग्री की अंतिम पुष्टि कानूनी जांच में होगी।