जामताड़ा जिले में बच्चों की सुरक्षा और उनके अधिकारों की जानकारी ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए शनिवार को बाल संरक्षण जागरूकता रथ रवाना किया गया। उपायुक्त आलोक कुमार ने रथ को हरी झंडी दिखाई। अभियान में बाल विवाह, बाल तस्करी, बाल श्रम और बाल यौन शोषण की रोकथाम पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
उपायुक्त ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा और उनके अधिकारों का संरक्षण जिला प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने बाल संरक्षण से जुड़ी सामाजिक समस्याओं को रोकने के लिए प्रशासनिक प्रयासों के साथ समुदाय की सक्रिय भागीदारी को भी जरूरी बताया। संबंधित पदाधिकारियों और हितधारकों को आपसी समन्वय से काम करने का निर्देश दिया गया।
यह जागरूकता अभियान फतेहपुर, करमाटांड़ और जामताड़ा प्रखंड के ग्रामीण तथा दूरस्थ इलाकों में चलाया जाएगा। रथ के माध्यम से बच्चों, किशोर-किशोरियों, अभिभावकों और आम लोगों तक बाल संरक्षण का संदेश पहुंचाने की योजना है। इसके लिए विद्यालयों, मंदिरों और सामुदायिक स्थलों पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
अभियान के दौरान लोगों को बाल विवाह, तस्करी, बाल श्रम और यौन शोषण से जुड़े जोखिमों के बारे में बताया जाएगा। बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को भी जागरूकता कार्यक्रम का हिस्सा बनाया गया है। इसके अलावा बच्चों के अधिकार, संरक्षण तंत्र, शिकायत दर्ज कराने और मामलों की रिपोर्टिंग की प्रक्रिया की जानकारी दी जाएगी।
अभियान का संचालन चेतना विकास की ओर से जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन के सहयोग से किया जा रहा है। चेतना विकास की निदेशिका रानी कुमारी ने कहा कि बाल संरक्षण व्यवस्था मजबूत करने के लिए समुदाय का सजग और सक्रिय होना आवश्यक है। अभियान के जरिए उपलब्ध सहायता सेवाओं की जानकारी भी दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचाई जाएगी।
रथ रवाना किए जाने के अवसर पर जिला उप निर्वाचन पदाधिकारी कयूम अंसारी, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी कला नाथ और जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी अंजू पोद्दार सहित चेतना विकास की टीम उपस्थित रही। अभियान का उद्देश्य बच्चों की सुरक्षा से जुड़े विषयों पर स्थानीय स्तर पर समझ बढ़ाना और जरूरत पड़ने पर शिकायत एवं सहायता की प्रक्रिया से लोगों को परिचित कराना है।