रांची में रविवार, 1 नवंबर को आयोजित झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (जेटेट) में नई नियुक्ति की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के साथ बड़ी संख्या में कार्यरत प्राथमिक शिक्षक भी शामिल होंगे। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 22 से 27 वर्ष पहले सरकारी विद्यालयों में नियुक्त करीब 12 हजार शिक्षकों ने परीक्षा के लिए आवेदन किया है।
ये शिक्षक शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 लागू होने से पहले नियुक्त हुए थे। उस समय प्राथमिक शिक्षक बनने के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य नहीं था। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में ऐसे करीब 20 हजार कार्यरत शिक्षक हैं जिनके पास टेट की पात्रता नहीं है।
कार्यरत शिक्षकों की भागीदारी के पीछे सुप्रीम कोर्ट का सितंबर 2025 का आदेश बताया गया है। आदेश के अनुसार, कक्षा एक से आठ तक पढ़ाने वाले ऐसे शिक्षकों को भी टेट उत्तीर्ण करना होगा जिनकी नियुक्ति शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने से पहले हुई थी और जिनकी सेवा पांच वर्ष से अधिक बची है। उनके लिए दो वर्ष के भीतर पात्रता हासिल करने की शर्त रखी गई है।
जिन शिक्षकों की सेवा पांच वर्ष से कम बची है, उन्हें टेट से छूट मिलने की बात कही गई है। हालांकि, प्रोन्नति के लिए उन्हें भी पात्रता परीक्षा पास करनी होगी। निर्धारित अवधि में परीक्षा उत्तीर्ण नहीं करने वाले शिक्षकों के संबंध में अनिवार्य सेवानिवृत्ति तक का प्रावधान आदेश में बताया गया है।
इसके बाद स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा नियमावली, 2026 में कार्यरत शिक्षकों के शामिल होने का प्रावधान किया। नियमावली में भागीदारी को ऐच्छिक रखा गया, लेकिन न्यायालय के आदेश के संभावित प्रभाव को देखते हुए अनेक शिक्षकों ने परीक्षा देने का निर्णय लिया।
राज्य में इससे पहले 2012 और 2016 में जेटेट आयोजित हुई थी। उन परीक्षाओं में सामान्य अभ्यर्थियों के साथ पारा शिक्षक शामिल हुए थे। आरटीई से पहले नियुक्त शिक्षकों पर टेट की अनिवार्यता का विभिन्न शिक्षक संघ विरोध भी कर रहे हैं, लेकिन इस बार कार्यरत शिक्षकों की उल्लेखनीय भागीदारी ने परीक्षा को नई नियुक्तियों से आगे सेवा और प्रोन्नति से जुड़ा अहम विषय बना दिया है।