जेपीएससी और जेएसएससी की चार नियुक्ति परीक्षाओं को रद्द करने के मामले में मंगलवार को सुनवाई

झारखंड हाई कोर्ट में सिविल सेवा, खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी, सीडीपीओ और सीजीएल परीक्षाओं से हुई नियुक्तियों को रद्द करने के सरकारी निर्णय पर मंगलवार को सुनवाई होगी।

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रांची स्थित झारखंड हाई कोर्ट का भवन, जहां नियुक्ति परीक्षाओं से जुड़े मामले की सुनवाई होगी

रांची स्थित झारखंड हाई कोर्ट में मंगलवार को चार नियुक्ति परीक्षाओं से जुड़े विवाद पर सुनवाई होगी। मामला जेपीएससी की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा, खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी और बाल विकास परियोजना पदाधिकारी परीक्षा तथा जेएसएससी की सीजीएल परीक्षा के माध्यम से हुई नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के निर्णय से संबंधित है।

इन परीक्षाओं के आधार पर नियुक्त पदाधिकारियों को हटाने के सरकारी आदेश पर अदालत पिछली सुनवाई में रोक लगा चुकी है। इसके बाद संबंधित अधिकारी फिलहाल अपने पदों पर बने हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार को नियुक्त अधिकारियों को वेतन नहीं मिलने के मुद्दे पर भी सुनवाई होने की उम्मीद है।

राज्य सरकार ने 18 अगस्त को आदेश जारी कर इन परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया था। बताया गया है कि सरकार ने उन परीक्षाओं के संबंध में यह कदम उठाया, जिनमें टीडीपीएल की भूमिका रही है। चारों परीक्षाओं में नियुक्ति प्रक्रिया पूरी हो जाने के कारण सरकारी आदेश का प्रभाव पहले से कार्यरत पदाधिकारियों पर भी पड़ा था।

जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने पूर्व की सुनवाई में प्रथम दृष्टया कहा था कि नियुक्तियां रद्द करने का निर्णय लेते समय नैसर्गिक न्याय का पालन नहीं होने की बात प्रतीत होती है। अदालत ने निर्देश दिया था कि इन परीक्षाओं से नियुक्त अभ्यर्थियों को अगले आदेश तक नौकरी से नहीं हटाया जाए।

हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब भी मांगा है। अदालत ने सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा था कि सीआईडी की अब तक की जांच में ऐसा कौन-सा तथ्य सामने आया, जिसके आधार पर नियुक्तियां रद्द करने जैसा निर्णय लिया गया। इसके साथ ही अदालत ने सीआईडी की जांच रिपोर्ट भी तलब की थी।

सरकार की अधिसूचना के खिलाफ हाई कोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल की गई हैं। इन याचिकाओं में चारों परीक्षाओं को रद्द करने के निर्णय को चुनौती दी गई है। अब मंगलवार की सुनवाई में सरकार के जवाब, सीआईडी जांच से संबंधित सामग्री और नियुक्त पदाधिकारियों की सेवा तथा वेतन से जुड़े प्रश्नों पर अदालत के समक्ष आगे की कार्यवाही होने की संभावना है।