रांची स्थित झारखंड हाईकोर्ट ने जैप-8 के जवानों को बड़ी राहत देते हुए पूर्व में मिली वेतन वृद्धि वापस लेने और अतिरिक्त भुगतान की रकम एकमुश्त वसूलने से संबंधित राज्य सरकार का आदेश निरस्त कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी कर्मचारी को अपना पक्ष रखने का अवसर दिए बिना पहले से मिला वित्तीय लाभ वापस लेना उचित नहीं है।
जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए पाया कि संबंधित जवानों को वेतन वृद्धि और अन्य परिणामी लाभ पूर्व के अदालती आदेश के आधार पर दिए गए थे। उस आदेश को किसी अन्य मंच पर चुनौती दिए जाने की जानकारी भी सामने नहीं आई। इसके बावजूद सरकार ने बाद में लाभ वापस लेने और अतिरिक्त भुगतान की वसूली का आदेश जारी कर दिया था।
अदालत के अनुसार, प्रभावित कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस दिए बिना ऐसी वित्तीय कार्रवाई नहीं की जा सकती। किसी कर्मचारी के वेतन या पहले से स्वीकृत लाभ पर प्रतिकूल निर्णय लेने से पहले उसका पक्ष सुनना आवश्यक है। इसी आधार पर सरकार का आदेश रद्द कर दिया गया।
फैसले से उन जैप-8 जवानों को राहत मिली है, जिन्हें पहले प्राप्त वेतन वृद्धि लौटाने के साथ अतिरिक्त भुगतान की पूरी राशि जमा करने को कहा गया था। आदेश निरस्त होने के बाद जवानों पर तत्काल एकमुश्त वसूली का दबाव नहीं रहेगा।
हाईकोर्ट में गुरुवार को अन्य मामलों पर भी सुनवाई हुई। कडरू स्थित एक्सट्रीम बार के डीजे संचालक संदीप प्रमाणिक की हत्या से जुड़ी 10 सजायाफ्ता लोगों की आपराधिक अपीलों में अदालत ने अनुसंधान की कमियों पर रांची के एसएसपी से विस्तृत रिपोर्ट मांगी। रिपोर्ट 30 नवंबर तक दाखिल करने और अगली सुनवाई में एसएसपी को उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया।
इसी दिन चान्हो के सिलागाई में एकलव्य विद्यालय के निर्माण स्थल से संबंधित जनहित याचिका पर भी सुनवाई हुई। जस्टिस रोंगोन मुखोपाध्याय और जस्टिस राम शर्मा की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता तथा राज्य सरकार की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। मामला पहले चयनित स्थल में बदलाव के विरोध से जुड़ा है।