झरिया पुनर्वास और अग्नि प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेने 31 अगस्त को धनबाद आएंगे पीएमओ सलाहकार

पीएमओ सलाहकार तरुण कपूर के प्रस्तावित दो दिवसीय दौरे में बीसीसीएल परियोजनाओं, उच्च जोखिम वाले इलाकों और बेलगड़िया-कर्माटांड़ पुनर्वास स्थलों का निरीक्षण शामिल है।

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धनबाद-झरिया में अग्नि प्रभावित क्षेत्रों और पुनर्वास व्यवस्था के प्रस्तावित निरीक्षण का सांकेतिक दृश्य

धनबाद और झरिया के कोयला क्षेत्रों से जुड़ी परियोजनाओं तथा पुनर्वास व्यवस्था की समीक्षा के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय के सलाहकार तरुण कपूर 31 अगस्त को दो दिवसीय दौरे पर धनबाद आएंगे। प्रस्तावित कार्यक्रम में भूमिगत आग से प्रभावित इलाकों, उच्च जोखिम वाले परिवारों और झरिया मास्टर प्लान के तहत विकसित पुनर्वास स्थलों की जमीनी स्थिति का निरीक्षण शामिल है।

दौरे की तैयारियों में बीसीसीएल प्रबंधन जुटा है। इस दौरान बीसीसीएल के सीएमडी मनोज कुमार अग्रवाल और कोल इंडिया के चेयरमैन बी साईराम समेत अन्य अधिकारियों के उपस्थित रहने का कार्यक्रम है। धनबाद पहुंचने से पहले तरुण कपूर के मां कल्याणेश्वरी मंदिर जाने का भी प्रस्ताव है।

पहले दिन बीसीसीएल गेस्ट हाउस में बैठक के बाद मूनिडीह क्षेत्र की कोल बेड मीथेन परियोजना का निरीक्षण निर्धारित है। इसके साथ बीसीसीएल की एक अन्य महत्वपूर्ण परियोजना की जानकारी लेने और कुसुंडा क्षेत्र के ए-फायर प्रोजेक्ट का दौरा करने की योजना है। यहां अग्नि प्रभावित तथा उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों की स्थिति देखी जाएगी।

दौरे के दूसरे दिन, एक सितंबर को बेलगड़िया और कर्माटांड़ पुनर्वास स्थलों का निरीक्षण प्रस्तावित है। इन स्थानों पर झरिया मास्टर प्लान के तहत विस्थापित परिवारों के लिए उपलब्ध कराए गए आवास और दूसरी पुनर्वास सुविधाओं की समीक्षा की जाएगी। झरिया कोलफील्ड में भूमिगत आग और उससे जुड़ा विस्थापन लंबे समय से प्रमुख चुनौती बना हुआ है।

धनबाद समाहरणालय में झरिया मास्टर प्लान और झरिया पुनर्वास एवं विकास प्राधिकरण के कार्यों पर समीक्षा बैठक भी प्रस्तावित है। बैठक में एनएचएआई, रेलवे, बीएसएनएल और दूरसंचार विभागों के अधिकारियों की भागीदारी हो सकती है। इससे पुनर्वास से जुड़े विभिन्न विभागों के काम और उनके बीच समन्वय की स्थिति सामने आने की उम्मीद है।

कार्यक्रम के दौरान सुरक्षित खनन, कोयला चोरी और अवैध खनन से जुड़ी चुनौतियों की भी समीक्षा प्रस्तावित है। हालांकि निरीक्षण या बैठकों के बाद लिए जाने वाले निर्णयों के बारे में अभी कोई जानकारी नहीं दी गई है। दौरे का प्रमुख केंद्र मौजूदा परियोजनाओं, अग्नि प्रभावित बस्तियों और पुनर्वास व्यवस्था की वास्तविक स्थिति का आकलन रहेगा।