झारखंड में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान नाम और उपनाम में अंतर कई मतदाताओं के लिए परेशानी का कारण बन रहा है। रांची में नोटिस पाने वाले लोग सुनवाई के लिए संबंधित कार्यालय पहुंचकर अपने दस्तावेज जमा कर रहे हैं। इनमें ऐसी विवाहित महिलाएं भी शामिल हैं, जिनके पुराने मतदाता पहचान पत्र में नाम के साथ “कुमारी” और बाद में बने कार्ड में “देवी” दर्ज है।
हेहल अंचल के बूथ संख्या 365 की बीएलओ निपुण पूर्ति के अनुसार, वर्ष 2003 की मतदाता सूची से नाम का मिलान नहीं होने पर नोटिस जारी किया जा रहा है। सत्यापन में यह भी सामने आ रहा है कि विवाह से पहले और बाद की मतदाता प्रविष्टियों में उपनाम बदलने के कारण रिकॉर्ड अलग दिखाई दे रहे हैं। ऐसी महिलाओं को फॉर्म-8 भरने के साथ प्रमाण के रूप में एक दस्तावेज देना है।
रांची समाहरणालय पहुंचे कुछ मतदाताओं ने हिंदी में अनुस्वार नहीं होने तथा पारंपरिक जाति आधारित उपनाम की जगह गोत्र आधारित उपनाम अपनाने को भी रिकॉर्ड में अंतर की वजह बताया। पुंदाग की एक महिला ने बताया कि पहले उनके नाम के साथ “कुमारी” दर्ज था, जबकि रांची में मतदाता बनने पर “देवी” जोड़ दिया गया। उन्होंने नोटिस मिलने के बाद जरूरी कागजात जमा कर दिए हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में 63 लाख से अधिक मतदाताओं को सत्यापन के लिए नोटिस भेजे गए हैं। इनमें तार्किक विसंगति की श्रेणी में 45,55,227 मतदाता बताए गए हैं। इस श्रेणी में नाम, माता-पिता के नाम या जन्मतिथि की अशुद्धि तथा एक से अधिक स्थानों की मतदाता सूची में नाम होने जैसी स्थितियां शामिल हैं।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार के अनुसार, ड्राफ्ट मतदाता सूची में नो-मैप या तार्किक विसंगति की श्रेणी में आए प्रत्येक मतदाता की निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी स्तर पर सुनवाई चल रही है। संबंधित लोगों से नियमानुसार आवश्यक दस्तावेज लिए जा रहे हैं। उपलब्ध दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर ही कारण सहित आदेश पारित किया जाएगा।
दावा और आपत्ति के निपटारे के लिए 15 सितंबर तक का समय निर्धारित है। नोटिस में दी गई तारीख पर मतदाता को सहायक निर्वाचन निबंधन पदाधिकारी के समक्ष उपस्थित होना होगा। पहली सूचना पर उपस्थित नहीं होने की स्थिति में दूसरा नोटिस जारी किया जाएगा। नोटिस मिलने के बाद साक्ष्य के साथ उपस्थित होने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है।