झारखंड का राजस्व संग्रह छह महीने में 13.86% घटा, जीएसटी में 22.54% की कमी

वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में झारखंड का कुल कर राजस्व 9,715.35 करोड़ रुपये रहा। पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले संग्रह 1,564 करोड़ रुपये से अधिक घटा है।

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झारखंड के राजस्व और जीएसटी संग्रह में दर्ज गिरावट को दर्शाती सांकेतिक तस्वीर

झारखंड में वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली छमाही के दौरान कर राजस्व संग्रह की रफ्तार पिछले वर्ष के मुकाबले धीमी रही। वाणिज्य कर विभाग के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2026 तक जीएसटी और गैर-जीएसटी मदों से कुल 9,715.35 करोड़ रुपये जुटाए गए। पिछले वित्तीय वर्ष की समान अवधि में यह राशि 11,279.18 करोड़ रुपये थी। इस तरह कुल संग्रह में 13.86 प्रतिशत, यानी 1,564 करोड़ रुपये से अधिक की कमी दर्ज की गई।

आंकड़ों में सबसे बड़ी गिरावट जीएसटी संग्रह में सामने आई है। सेटलमेंट सहित राज्य का कुल जीएसटी संग्रह सितंबर तक 5,736.25 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 7,405.22 करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे। सालाना तुलना में यह 22.54 प्रतिशत की कमी है।

जीएसटी के भीतर आईजीएसटी सेटलमेंट में भी बड़ा अंतर दर्ज किया गया। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, इस मद का संग्रह पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 56.98 प्रतिशत घटा है। चालू वित्तीय वर्ष के शुरुआती छह महीनों के कुल राजस्व प्रदर्शन पर जीएसटी की इस कमी का स्पष्ट असर पड़ा है।

इसके विपरीत गैर-जीएसटी राजस्व में मामूली बढ़ोतरी हुई है। सितंबर तक इस श्रेणी में 3,979.10 करोड़ रुपये का संग्रह दर्ज किया गया, जो पिछले वर्ष के 3,873.96 करोड़ रुपये से 2.71 प्रतिशत अधिक है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इस वृद्धि में वैट संग्रह की 13.30 प्रतिशत बढ़ोतरी की प्रमुख भूमिका रही।

राज्य ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए कुल 24,000 करोड़ रुपये के राजस्व संग्रह का वार्षिक लक्ष्य तय किया है। छह महीने पूरे होने तक इस लक्ष्य का 40.48 प्रतिशत हासिल हुआ है। अलग-अलग मदों में जीएसटी के 14,563.74 करोड़ रुपये के लक्ष्य का 39.39 प्रतिशत और गैर-जीएसटी के 9,436.26 करोड़ रुपये के लक्ष्य का 42.17 प्रतिशत संग्रह हुआ है।

पहली छमाही के ये आंकड़े बताते हैं कि गैर-जीएसटी मदों में सीमित सुधार के बावजूद कुल राजस्व पिछले वर्ष के स्तर से नीचे है। वार्षिक लक्ष्य की शेष राशि जुटाने के लिए वित्तीय वर्ष के अगले छह महीनों में संग्रह की गति बढ़ानी होगी। फिलहाल विभागीय विवरण में गिरावट के किसी कारण या आगे उठाए जाने वाले कदमों की जानकारी नहीं दी गई है।