रांची से सामने आई एक रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड की त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के लिए स्वीकृत 658 करोड़ रुपये के उपयोग की प्रक्रिया अब तक पूरी तरह शुरू नहीं हो सकी है। इस राशि से गांवों में पानी, सड़क, नाली, आंगनबाड़ी केंद्र और सरकारी स्कूलों से जुड़े छोटे निर्माण तथा मरम्मत के काम किए जाने हैं। खर्च की विस्तृत गाइडलाइन जारी नहीं होने के कारण योजनाओं के क्रियान्वयन में देरी बताई गई है।
पांचवें राज्य वित्त आयोग की अनुशंसा के आधार पर पंचायती राज सचिव ने 29 मार्च 2026 को आवंटन पत्र जारी किया था। रिपोर्ट में कहा गया है कि करीब छह महीने बाद भी यह स्पष्ट प्रक्रिया सामने नहीं आई कि राशि किन मदों में और किस तरीके से खर्च की जाएगी। इससे स्थानीय स्तर पर उपलब्ध धन का विकास कार्यों में उपयोग शुरू नहीं हो पाया है।
स्वीकृत राशि का 75 प्रतिशत हिस्सा ग्राम पंचायतों के लिए निर्धारित है। इसके तहत ग्राम पंचायतों को 493.51 करोड़ रुपये मिलने हैं। पंचायत समितियों के लिए 15 प्रतिशत यानी 98.70 करोड़ रुपये और जिला परिषदों के लिए 10 प्रतिशत अर्थात 65.79 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। सबसे बड़ा हिस्सा ग्राम पंचायतों का होने के कारण देरी का सीधा प्रभाव गांवों की छोटी लेकिन जरूरी योजनाओं पर पड़ सकता है।
इस कोष से नल-जल योजनाओं और जलमीनारों की मरम्मत, बंद योजनाओं को दोबारा चालू करने, ग्रामीण नालियों तथा कच्ची-पक्की सड़कों के काम कराए जाने थे। आंगनबाड़ी केंद्रों और सरकारी विद्यालयों में आवश्यक छोटे निर्माण भी प्रस्तावित उपयोग में शामिल बताए गए हैं। झारखंड की 4,423 पंचायतों और लगभग 2.50 करोड़ ग्रामीण आबादी के संदर्भ में यह आवंटन महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
त्रिस्तरीय पंचायत जनप्रतिनिधि संघ के अध्यक्ष विकास कुमार महतो ने दिशानिर्देश जारी होने में हुई देरी पर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि धन स्वीकृत होने के बावजूद उपयोग की प्रक्रिया तय नहीं होने से जनप्रतिनिधियों के सामने व्यावहारिक कठिनाई बनी हुई है और स्थानीय जरूरतों से जुड़े काम आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के सचिव मनोज कुमार के अनुसार, 197 करोड़ रुपये जिला परिषदों को हस्तांतरित किए जा चुके हैं और शेष राशि का प्रबंध भी कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि पूरी राशि पंचायतों के खातों में भेजने के साथ काम के निष्पादन और खर्च की विस्तृत गाइडलाइन जिलों को उपलब्ध कराई जाएगी। हालांकि, इसके लिए रिपोर्ट में कोई निश्चित तारीख नहीं बताई गई है।