जमशेदपुर में एक्सएलआरआई ने झारखंड के जंगलों में फैल रहे लैंटाना खरपतवार को हटाकर उसके बायोमास से बायोचार तैयार करने की योजना पर काम शुरू किया है। संस्थान ने इस संबंध में झारखंड सरकार को एक मास्टर प्लान सुझाया है। प्रस्ताव का उद्देश्य जंगलों पर पड़ रहे दबाव को कम करने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के अवसर तैयार करना है।
लैंटाना को झारखंड के कई क्षेत्रों में रायमुनिया, कुटुस या तांतानी के नाम से भी जाना जाता है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, यह तेजी से फैलने वाला आक्रामक खरपतवार है और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंचा रहा है। योजना में तकनीकी साझेदारों की सहायता से इसे जंगलों से हटाने और एकत्रित बायोमास का उपयोग करने की बात कही गई है।
प्रस्ताव के तहत लैंटाना के सूखे बायोमास को पहले छोटे टुकड़ों में काटकर उसकी नमी कम की जाएगी। इसके बाद उसे बंद भट्टी में ऑक्सीजन रहित या बेहद सीमित वातावरण में लगभग 400 से 600 डिग्री सेल्सियस तापमान पर गर्म किया जाएगा। पायरोलिसिस कहलाने वाली इस प्रक्रिया के बाद कार्बन से भरपूर हल्का और छिद्रयुक्त बायोचार प्राप्त होता है।
योजना में बायोचार को केवल ईंधन जैसे उत्पाद के रूप में नहीं देखा गया है। उपलब्ध जानकारी में इसे कृषि भूमि की उर्वरता और जल धारण क्षमता बढ़ाने में मददगार बताया गया है। प्रस्ताव तैयार करने वालों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय स्वैच्छिक कार्बन बाजारों में भी इस उत्पाद की मांग है, जिससे पहल को आर्थिक आधार मिलने की संभावना देखी जा रही है।
इस पहल का सामाजिक पक्ष ग्रामीण समुदायों की भागीदारी से जुड़ा है। प्रस्ताव में विशेष रूप से आदिम जनजातीय समूहों के परिवारों और महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों को प्राथमिकता देने की बात रखी गई है। लैंटाना की सफाई, बायोमास एकत्र करने और उसके प्रसंस्करण से स्थानीय स्तर पर उद्यम तथा रोजगार के अवसर विकसित करने का लक्ष्य है।
फिलहाल यह झारखंड सरकार को सुझाई गई योजना है। इसके क्रियान्वयन, संभावित क्षेत्रों, उत्पादन क्षमता, निवेश और समयसीमा का विवरण उपलब्ध सूचना में नहीं दिया गया है। आगे की प्रगति सरकार के स्तर पर प्रस्ताव पर होने वाले विचार और तकनीकी साझेदारी की रूपरेखा पर निर्भर करेगी।