झारखंड के पांच मेडिकल कॉलेजों में 65 सह-प्राध्यापकों की संविदा नियुक्ति, 23 अक्टूबर को साक्षात्कार

स्वास्थ्य विभाग पांच सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सह-प्राध्यापक के 65 पद भरेगा। चयन के लिए रिम्स, रांची में 23 अक्टूबर को वॉक-इन साक्षात्कार होगा।

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झारखंड के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सह-प्राध्यापक नियुक्ति के लिए रांची में साक्षात्कार

झारखंड के पांच सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सह-प्राध्यापक के 65 रिक्त पदों पर संविदा नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की गई है। स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग ने इसके लिए विज्ञापन जारी किया है। अभ्यर्थियों का चयन 23 अक्टूबर को रिम्स, रांची के प्रशासनिक भवन में होने वाले वॉक-इन साक्षात्कार के माध्यम से किया जाएगा। साक्षात्कार सुबह 10:30 बजे शुरू होगा।

कुल रिक्तियों में 53 पद सामान्य नियुक्ति प्रक्रिया और 12 पद बैकलॉग के तहत भरे जाने हैं। सामान्य प्रक्रिया वाले पदों में अनारक्षित वर्ग के 35, अनुसूचित जनजाति के नौ, अनुसूचित जाति के चार, बीसी-वन के चार और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए एक पद रखा गया है। बैकलॉग रिक्तियों में अनुसूचित जनजाति के तीन, अनुसूचित जाति के चार, बीसी-वन के चार और बीसी-टू का एक पद शामिल है।

चयनित सह-प्राध्यापकों को दो लाख रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलेगा। नियुक्ति की प्रारंभिक अवधि अधिकतम दो वर्ष होगी, जिसे संतोषजनक प्रदर्शन के आधार पर बढ़ाया जा सकेगा। आवेदकों के लिए अधिकतम आयु सीमा 70 वर्ष निर्धारित की गई है और उनके पास राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के मानकों के अनुरूप योग्यता होना जरूरी है। आवेदन पत्र विभाग की आधिकारिक वेबसाइट के भर्ती अनुभाग से प्राप्त किया जा सकता है।

यह नियुक्ति शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज धनबाद, एमजीएम मेडिकल कॉलेज जमशेदपुर, फूलो-झानो मेडिकल कॉलेज दुमका, मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज पलामू और शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज हजारीबाग के विभिन्न विभागों के लिए होगी। जारी सूचना में प्रत्येक कॉलेज के लिए रिक्त पदों की अलग-अलग संख्या नहीं बताई गई है।

इससे पहले 21 सितंबर को इन्हीं 65 पदों के लिए आयोजित वॉक-इन साक्षात्कार में केवल 13 अभ्यर्थी पहुंचे थे। उपलब्ध विवरण के अनुसार, उनमें भी अधिकतर उम्मीदवार निर्धारित योग्यता पूरी नहीं करते थे। पद खाली रह जाने के बाद विभाग ने नियुक्ति प्रक्रिया दोबारा शुरू की है।

इन मेडिकल कॉलेजों में शिक्षकों की कमी पहले भी चिंता का विषय रही है। मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज में शिक्षकों की कमी पर राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग आपत्ति जता चुका है, जबकि धनबाद मेडिकल कॉलेज में रिक्त शिक्षक पदों को एमबीबीएस सीटों के विस्तार में बाधा बताया गया है। नई प्रक्रिया का उद्देश्य इन संस्थानों में उपलब्ध रिक्तियों को भरना है।