11वीं-13वीं जेपीएससी परीक्षा की जांच में सफल अभ्यर्थियों से पूछताछ की तैयारी

जेपीएससी परीक्षा से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच में सीआईडी कुछ सफल अभ्यर्थियों को पूछताछ के लिए बुला सकती है। जांच में सामने आए तथ्यों का पुराने साक्ष्यों से मिलान किया जा रहा है।

2 मिनट पढ़ें 4 बार पढ़ी गई
रांची में जेपीएससी परीक्षा से जुड़ी जांच और पूछताछ की प्रतीकात्मक तस्वीर

रांची में 11वीं से 13वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच का दायरा सफल अभ्यर्थियों तक बढ़ सकता है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सीआईडी की विशेष जांच टीम ने एक दर्जन से अधिक अभ्यर्थियों की पहचान की है और उन्हें पूछताछ के लिए समन भेजने की तैयारी की जा रही है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसी आईटीआई लिमिटेड के प्रतिनिधि कृष्णा कुमार से हुई पूछताछ के दौरान कुछ सफल अभ्यर्थियों के नाम सामने आए। सीआईडी अब इस पूछताछ से मिली जानकारियों का जांच में पहले सामने आए तथ्यों से मिलान कर रही है। अभ्यर्थियों पर लगे आरोप अभी जांच के अधीन हैं।

इसी परीक्षा से जुड़े मामले में साक्षात्कार को प्रभावित करने और कथित वसूली की बात भी जांच में आने का दावा किया गया है। इस सिलसिले में तत्कालीन सदस्य अजीता भट्टाचार्य के निजी सहायक ब्रजलाल की गिरफ्तारी की जानकारी दी गई है। जांच एजेंसी की ओर से चिह्नित अभ्यर्थियों से पूछताछ के बाद ही उनकी भूमिका को लेकर स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

जेपीएससी मामले के साथ सीआईडी की अलग टीम जेएसएससी सीजीएल प्रकरण की भी जांच कर रही है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, सीजीएल मामले में अब तक 38 गिरफ्तारियां हुई हैं और करीब 550 सफल अभ्यर्थियों से पूछताछ की जा चुकी है। पूछताछ में अभ्यर्थियों से परीक्षा की तैयारी और संबंधित विषयों की जानकारी के बारे में भी सवाल किए गए।

रिपोर्ट के अनुसार, पूछताछ का सामना कर चुके अधिकारियों ने स्वयं को निर्दोष बताया और किसी तरह के आर्थिक लेनदेन से इनकार किया। दूसरी ओर, जांच एजेंसी के पास लेनदेन से जुड़े साक्ष्य होने का दावा किया गया है। इन दावों की न्यायिक पुष्टि से संबंधित कोई विवरण उपलब्ध जानकारी में नहीं दिया गया है।

जांच अभी जारी है और नए दौर की पूछताछ से परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी तथा संबंधित लोगों की भूमिका पर अतिरिक्त जानकारी सामने आ सकती है। केवल पूछताछ के लिए बुलाया जाना दोष सिद्ध होना नहीं है; किसी भी अभ्यर्थी की जवाबदेही जांच और आगे की वैधानिक प्रक्रिया के आधार पर ही तय होगी।