झारखंड के सभी जिलों में आईसीयू सुविधा विकसित करने का लक्ष्य, रांची में क्रिटिकल केयर सम्मेलन शुरू

रांची में तीन दिवसीय ईस्ट जोन क्रिटिकल केयर कॉन्फ्रेंस के दौरान स्वास्थ्य विभाग ने जिला स्तर पर आईसीयू सहायता, टेली-आईसीयू और विशेषज्ञ चिकित्सकों की संख्या बढ़ाने की योजनाएं बताईं।

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रांची में आयोजित ईस्ट जोन क्रिटिकल केयर कॉन्फ्रेंस में उपस्थित स्वास्थ्य अधिकारी और चिकित्सक

रांची में 14वें ईस्ट जोन क्रिटिकल केयर कॉन्फ्रेंस के दौरान झारखंड के सभी जिलों में आईसीयू सुविधा विकसित करने के सरकारी लक्ष्य पर चर्चा हुई। रांची क्रिटिकल केयर सोसाइटी की ओर से आयोजित यह तीन दिवसीय सम्मेलन 11 से 13 सितंबर तक राजधानी के एक बैंक्वेट हॉल में चल रहा है। इसका विषय विज्ञान, तकनीक और मानवीय संवेदना को जोड़ते हुए समन्वित क्रिटिकल केयर उपलब्ध कराना रखा गया है।

सम्मेलन का उद्घाटन राज्य के अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य एके सिंह ने किया। उन्होंने कहा कि गंभीर रूप से बीमार मरीजों के उपचार में समय पर जांच और चिकित्सा महत्वपूर्ण है। कोविड-19 महामारी के दौरान वेंटिलेटर, मॉनिटर और आईसीयू बेड की कमी के कारण बड़े शहरों में भी मरीजों को समय पर उपचार मिलने में कठिनाई हुई थी।

अपर मुख्य सचिव ने झारखंड के दुर्गम और जनजातीय बहुल इलाकों में गंभीर मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने की चुनौती का उल्लेख किया। उनके अनुसार कई गांवों तक एंबुलेंस और अन्य वाहनों की पहुंच कठिन है। राज्य में आईसीयू सुविधाओं की सीमित उपलब्धता, चिकित्सकों और अस्पतालों में बेड की कमी तथा गंभीर बीमारियों के इलाज का खर्च भी प्रमुख चुनौतियां हैं।

उन्होंने बताया कि 10 बेड वाली टेली-आईसीयू सुविधा के माध्यम से जिला स्तर पर गंभीर मरीजों के उपचार में सहायता दी जा रही है। स्वास्थ्य सेवाओं में आगे कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग बढ़ाने की भी योजना है। ऐसी प्रणाली मरीजों के स्वास्थ्य संबंधी विभिन्न मापदंडों की निगरानी में मदद करेगी, लेकिन उपचार का अंतिम निर्णय चिकित्सक ही लेंगे।

विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए चिकित्सा शिक्षा के विस्तार पर भी काम चल रहा है। अभी रिम्स में विशेषज्ञ चिकित्सा की पढ़ाई के लिए नौ सीटें उपलब्ध हैं। सरकार का लक्ष्य अगले तीन से चार वर्षों में अन्य संस्थानों को जोड़ते हुए इन सीटों की संख्या 100 तक पहुंचाना है। सरकारी और निजी अस्पतालों के बीच समन्वय से मजबूत क्रिटिकल केयर व्यवस्था विकसित करने पर भी जोर दिया गया।

सम्मेलन में देशभर से 150 से अधिक फैकल्टी सदस्य और 200 से अधिक डॉक्टर भाग ले रहे हैं। कार्यक्रम की शुरुआत एक दिवसीय व्यावहारिक कार्यशाला से हुई। इसके बाद वैज्ञानिक सत्र और विशेषज्ञ चर्चाएं आयोजित की जा रही हैं, जिनमें क्रिटिकल केयर की तकनीक, उपचार व्यवस्था और दूरस्थ क्षेत्रों तक विशेषज्ञ सहायता पहुंचाने के विषय शामिल हैं।