रांची में विश्व प्राथमिक उपचार दिवस पर सिटी बसों, कोतवाली थाने और जिला स्कूल की प्राथमिक उपचार व्यवस्था की मैदानी पड़ताल की गई। जांचे गए अलग-अलग रूटों की सिटी बसों में फर्स्ट-एड बॉक्स नहीं मिले। कोतवाली थाने में बॉक्स तो था, लेकिन उसमें रखी दवाएं एक्सपायर पाई गईं।
नगर निगम की ओर से चलाई जा रही जिन बसों का जायजा लिया गया, उनके चालक और सह-चालक फर्स्ट-एड बॉक्स उपलब्ध नहीं करा सके। किसी ने बॉक्स के गिरने या टूटने की बात कही, जबकि कुछ ने उसके मौजूद होने का दावा किया, लेकिन उसे दिखा नहीं पाए। यह स्थिति यात्रा के दौरान अचानक चोट या स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थिति में तत्काल सहायता की उपलब्धता पर सवाल खड़ा करती है।
कोतवाली थाने में थाना प्रभारी सनोज कुमार चौधरी ने दवाओं से भरा फर्स्ट-एड बॉक्स होने की जानकारी दी। निरीक्षण के दौरान बॉक्स में दर्द और बुखार की दवाओं से लेकर क्रीम तक एक्सपायर मिलीं। ऐसे में बॉक्स की मौजूदगी के बावजूद जरूरत के समय उसमें रखी सामग्री उपयोगी नहीं रह जाती।
सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस बन चुके ऐतिहासिक जिला स्कूल में फर्स्ट-एड बॉक्स और जरूरत की लगभग सभी दवाएं उपलब्ध मिलीं। हालांकि बॉक्स स्टाफ रूम की अलमारी में बंद था। प्राथमिक उपचार सामग्री ऐसे स्थान पर रखने की जरूरत बताई गई है, जहां आपात स्थिति में उसे आसानी से और तुरंत निकाला जा सके।
प्राथमिक उपचार का उद्देश्य किसी गंभीर चोट या बीमारी का पूरा इलाज करना नहीं, बल्कि चिकित्सकीय सहायता मिलने तक प्रभावित व्यक्ति की स्थिति संभालना और हालत बिगड़ने से रोकना है। सड़क दुर्घटना, रक्तस्राव, जलने, बेहोशी, दम घुटने या दिल का दौरा जैसी परिस्थितियों में शुरुआती सहायता की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
इस वर्ष विश्व प्राथमिक उपचार दिवस की थीम “ऑन द मूव, बट नॉट अलोन” रखी गई है। इसका केंद्र यात्रा और प्रवास के दौरान प्राथमिक उपचार की उपलब्धता है। रांची की पड़ताल में सामने आई स्थितियां बताती हैं कि केवल बॉक्स रखना पर्याप्त नहीं है; उसमें उपयोगी सामग्री, समय पर जांच और आसान पहुंच भी जरूरी है।