झारखंड के सरकारी चिकित्सकों ने तीन दिन टाला आंदोलन, 22 अक्टूबर से कार्य बहिष्कार का फैसला बरकरार

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां रूपी सोरेन के निधन के बाद सरकारी चिकित्सकों ने तीन दिनों के आंदोलन कार्यक्रम स्थगित किए हैं। हालांकि, 22 अक्टूबर से प्रस्तावित अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार फिलहाल यथावत है।

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रांची में आंदोलन के कार्यक्रम पर चर्चा करते झारखंड के सरकारी चिकित्सक

रांची में झारखंड के सरकारी चिकित्सकों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां रूपी सोरेन के निधन के बाद अपने चरणबद्ध आंदोलन के तत्काल कार्यक्रमों को तीन दिनों के लिए स्थगित कर दिया है। चिकित्सकों के संगठन झारखंड स्टेट हेल्थ सर्विसेज एसोसिएशन ने शोक की गरिमा को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया।

पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सरकारी चिकित्सकों को नौ अक्टूबर को काला बिल्ला लगाकर काम करना था। अब इस दिन विरोध दर्ज नहीं कराया जाएगा। इसके बाद के दो दिनों में प्रस्तावित जनसंपर्क अभियान को भी स्थगित कर दिया गया है। संगठन ने रूपी सोरेन को श्रद्धांजलि देते हुए मुख्यमंत्री और उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की है।

एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि यह बदलाव केवल तीन दिनों के कार्यक्रमों तक सीमित है। चिकित्सकों की मांगों को लेकर चल रहे चरणबद्ध आंदोलन की आगे की रूपरेखा में फिलहाल कोई परिवर्तन नहीं किया गया है।

संगठन के अनुसार, यदि राज्य सरकार लंबित मांगों पर ठोस पहल नहीं करती है तो 22 अक्टूबर से प्रस्तावित अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार शुरू होगा। इस कार्यक्रम को वापस लेने या इसकी तारीख बदलने की कोई घोषणा नहीं की गई है। एसोसिएशन का कहना है कि इस आंदोलन में राज्य के करीब 1,200 सरकारी चिकित्सक शामिल होंगे।

सरकारी चिकित्सकों की प्रमुख मांगों में डायनेमिक एसीपी लागू करना, रिक्त पदों पर नियमित नियुक्ति करना और संविदा नियुक्ति नियमावली में बदलाव शामिल हैं। इसके अलावा सेवानिवृत्ति आयु से संबंधित विषय भी उनकी मांगों में रखा गया है। संगठन इन सेवा संबंधी मामलों का समयबद्ध समाधान चाहता है।

फिलहाल तीन दिनों के विराम के कारण नौ अक्टूबर का काला बिल्ला कार्यक्रम और उससे जुड़ा जनसंपर्क अभियान नहीं होगा। इसके बाद आंदोलन के निर्धारित कार्यक्रम आगे बढ़ेंगे। 22 अक्टूबर के कार्य बहिष्कार से पहले सरकार की ओर से मांगों पर होने वाली पहल पर चिकित्सकों के अगले कदम की निगाह रहेगी।