रांची में झारखंड के सरकारी स्कूलों की पढ़ाई में शारीरिक शिक्षा और खेल को अलग विषय के रूप में शामिल करने की तैयारी की जा रही है। राज्य सरकार के स्तर पर इस प्रस्ताव पर सहमति बन चुकी है और अब इसे लागू करने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को खेल, फिटनेस, स्वास्थ्य और अनुशासन से जुड़ी व्यवस्थित शिक्षा देना है।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत हाई स्कूल और प्लस टू स्तर पर ‘फिजिकल एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स’ को वैकल्पिक विषय के रूप में पढ़ाया जाएगा। मैट्रिक और इंटरमीडिएट की परीक्षा में भी इस विषय को जगह मिलेगी। पाठ्यक्रम में सैद्धांतिक पढ़ाई के साथ व्यावहारिक गतिविधियां शामिल रहेंगी।
विषय की परीक्षा कुल 100 अंकों की होगी। इसमें सैद्धांतिक परीक्षा के लिए 70 अंक और प्रायोगिक परीक्षा के लिए 30 अंक निर्धारित किए गए हैं। सफल होने के लिए विद्यार्थियों को दोनों हिस्सों में अलग-अलग कम से कम 33 प्रतिशत अंक प्राप्त करने होंगे। इस हिसाब से थ्योरी में न्यूनतम 23 और प्रैक्टिकल में 10 अंक जरूरी होंगे।
यह पहल केवल बोर्ड कक्षाओं तक सीमित नहीं रहेगी। कक्षा एक से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए खेल और शारीरिक गतिविधियों को व्यवस्थित करने की तैयारी है। झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद ने इसके लिए मार्गदर्शिका-सह-हस्तपुस्तिका तैयार की है, जिसे जिलों को उपलब्ध कराया जाएगा। स्कूल आयु वर्ग के अनुसार इसी मार्गदर्शिका के आधार पर गतिविधियां संचालित करेंगे।
झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद के निदेशक शशि रंजन के अनुसार, विषय को स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने का निर्णय लिया गया है। पढ़ाई और गतिविधियों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए कार्ययोजना बन रही है। स्कूलों में खेल संबंधी कार्यक्रम मार्गदर्शिका के अनुरूप संचालित किए जाएंगे।
राज्य के सरकारी हाई स्कूलों में हाल के वर्षों में नियुक्त करीब एक हजार खेल शिक्षकों की भूमिका भी इस व्यवस्था में महत्वपूर्ण होगी। वे खेल तकनीक के साथ फिटनेस, शारीरिक स्वास्थ्य और अनुशासन की जानकारी देंगे। विभाग के खेल समन्वयक धीरसेन सोरेंग ने इसे खेल और पढ़ाई के बीच बेहतर तालमेल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।