देवघर में प्रशस्त ऐप पर शिक्षकों की ऑनबोर्डिंग जारी, सारवां सबसे आगे

सरकारी स्कूलों के बच्चों में दिव्यांगता की शुरुआती पहचान के लिए देवघर जिले के शिक्षकों को प्रशस्त ऐप से जोड़ा जा रहा है। आधिकारिक प्रखंडवार रिपोर्ट में सारवां की प्रगति सर्वाधिक है।

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देवघर में प्रशस्त ऐप पर शिक्षकों की ऑनबोर्डिंग से जुड़ी सांकेतिक तस्वीर

देवघर जिले के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों में दिव्यांगता की शुरुआती पहचान के लिए शिक्षकों को प्रशस्त ऐप पर जोड़ने का अभियान चल रहा है। शिक्षा मंत्रालय के प्रशस्त कार्यक्रम के तहत शिक्षक स्क्रीनिंग चेकलिस्ट का उपयोग करेंगे, ताकि आवश्यकता वाले बच्चों की समय रहते पहचान की जा सके।

जिला नोडल पदाधिकारी सूरज कुमार श्रीवास्तव की ओर से 24 सितंबर 2026 को जारी प्रखंडवार रिपोर्ट के अनुसार, ऑनबोर्डिंग में सारवां सबसे आगे है। यहां कुल 474 शिक्षकों में से 430 ऐप से जुड़ चुके हैं। इसकी प्रगति 90.72 प्रतिशत दर्ज की गई है।

करौं में 508 में से 451 शिक्षकों की ऑनबोर्डिंग पूरी हुई है और प्रगति 88.78 प्रतिशत है। मारगोमुंडा में 437 में से 337 शिक्षक जुड़े हैं, जो 77.12 प्रतिशत है। पालोजोरी में 835 में से 564 शिक्षकों के जुड़ने के साथ यह आंकड़ा 67.54 प्रतिशत तक पहुंचा है।

मोहनपुर में कुल 979 में से 614 शिक्षक प्रशस्त ऐप पर आए हैं और वहां 62.72 प्रतिशत काम पूरा हुआ है। सोनारायठाढ़ी में 362 में से 210 शिक्षकों की ऑनबोर्डिंग हुई है, जिसकी दर 58.01 प्रतिशत है। मधुपुर में 1,290 में से 637 शिक्षक जुड़े हैं और प्रगति 49.38 प्रतिशत दर्ज हुई है।

सारठ में 877 शिक्षकों में से 400 की ऑनबोर्डिंग के साथ 45.61 प्रतिशत लक्ष्य पूरा हुआ है। देवीपुर में 662 में से 166 शिक्षक ऐप से जुड़े हैं और वहां प्रगति 25.08 प्रतिशत है। रिपोर्ट में प्रखंडों के बीच अभियान की रफ्तार में स्पष्ट अंतर सामने आया है।

देवघर प्रखंड में कुल 2,190 शिक्षकों में से 462 की ऑनबोर्डिंग हुई है, जो 21.1 प्रतिशत है। रिपोर्ट के मुताबिक यहां 79 प्रतिशत से अधिक शिक्षक अभी प्रक्रिया से नहीं जुड़े हैं। प्रशस्त स्क्रीनिंग का उद्देश्य बच्चों में दिव्यांगता की समय पर पहचान करना है, जिससे उन्हें उपयुक्त शिक्षा और उपलब्ध सरकारी सुविधाएं दिलाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके।