रांची: झारखंड के सरकारी स्कूलों में नया शैक्षणिक सत्र शुरू हुए पांच महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन कई विद्यार्थियों को यूनिफॉर्म के लिए निर्धारित राशि अब तक नहीं मिल सकी है। भुगतान लंबित रहने के कारण कुछ बच्चे पुरानी पोशाक पहनकर स्कूल जा रहे हैं, जबकि नए दाखिले वाले विद्यार्थियों के पास निर्धारित ड्रेस नहीं होने की समस्या सामने आ रही है।
पुरानी यूनिफॉर्म छोटी या खराब हो जाने के बाद भी परिवारों को फिलहाल उसी से काम चलाना पड़ रहा है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए स्कूल की पोशाक, जूते और पढ़ाई से जुड़ी दूसरी जरूरतों का खर्च एक साथ उठाना कठिन हो रहा है। अभिभावकों के अनुसार, योजना की राशि समय पर नहीं मिलने से उन पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव बढ़ा है।
विभागीय व्यवस्था में कक्षा पहली से पांचवीं तक के विद्यार्थियों के लिए पोशाक मद में 600 रुपये देने का प्रावधान है। छठी से आठवीं कक्षा के बच्चों को 700 रुपये और नौवीं से 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को 1,200 रुपये मिलने हैं। यह सहायता बच्चों की स्कूल ड्रेस संबंधी जरूरत पूरी करने के उद्देश्य से दी जाती है।
इस बार भुगतान की प्रक्रिया में बदलाव भी किया गया है। नई व्यवस्था के तहत विद्यार्थियों से संबंधित जानकारी का ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से सत्यापन करने के बाद राशि भेजने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। इसका उद्देश्य भुगतान व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाना बताया गया है, हालांकि इस प्रक्रिया का असर राशि मिलने की समय-सीमा पर पड़ा है।
झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद के निदेशक शशि रंजन के अनुसार, विद्यार्थियों को पोशाक की सुविधा समग्र शिक्षा अभियान के तहत दी जाती है। उन्होंने बताया कि इस बार केंद्र से राशि का आवंटन मिलने में देरी हुई है। आवंटन उपलब्ध होते ही भुगतान की प्रक्रिया शुरू की जाएगी और विद्यार्थियों के लिए निर्धारित यूनिफॉर्म राशि उपलब्ध कराई जाएगी।
विभाग ने लंबित भुगतान की स्थिति दूर करने का प्रयास किए जाने की बात कही है। राशि प्राप्त होने के बाद आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर पैसा बच्चों के खातों तक पहुंचाया जाना है। तब तक प्रभावित विद्यार्थियों और उनके परिवारों को नई यूनिफॉर्म की व्यवस्था के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।