झारखंड में 52,629 ड्रॉपआउट बच्चों का दोबारा नामांकन, नए सर्वे में 19,862 स्कूल से बाहर

शिक्षा विभाग के मुताबिक 2025-26 में चिन्हित 59,094 बच्चों में करीब 89 प्रतिशत का फिर नामांकन कराया गया। चालू वित्तीय वर्ष में मिले 19,862 बच्चों में से 9,560 स्कूल लौट चुके हैं।

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रांची में स्कूल से बाहर बच्चों की शिक्षा पर आयोजित संवाद सत्र

रांची में झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद ने स्कूल से बाहर रह गए बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा में वापस लाने के अभियान की प्रगति साझा की है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्यभर में ऐसे 59,094 बच्चों की पहचान हुई थी। इनमें 52,629 बच्चों का दोबारा नामांकन कराया गया, जो चिन्हित संख्या का करीब 89 प्रतिशत है।

चालू वित्तीय वर्ष में हुए घरेलू सर्वेक्षण में छह से 18 वर्ष आयु वर्ग के 19,862 बच्चे स्कूल से बाहर मिले हैं। इनमें अब तक 9,560 बच्चों का नामांकन हो चुका है। शेष बच्चों का पता लगाने और उन्हें विद्यालय से जोड़ने की प्रक्रिया जारी है। विभाग के सामने नामांकन के साथ बच्चों को नियमित रूप से स्कूल में बनाए रखने की भी चुनौती है।

अंतरराष्ट्रीय साक्षरता सप्ताह के तहत परिषद ने गुरुवार को स्कूल लौटे बच्चों के लिए एक संवाद सत्र आयोजित किया। इसमें करीब 50 बच्चे शामिल हुए। प्रतिभागियों में कुछ ऐसे बच्चे भी थे, जिन्होंने पहले कभी विद्यालय में प्रवेश नहीं लिया था, जबकि कुछ ने बीच में पढ़ाई छोड़ दी थी। बच्चों ने पढ़ने और कहानी सुनाने जैसी गतिविधियों के माध्यम से अपनी सीख प्रस्तुत की।

परिषद के निदेशक शशि रंजन के अनुसार, ड्रॉपआउट कम करने के लिए विभाग और निदेशालय लगातार प्रयास कर रहे हैं। इस काम में स्वयंसेवी संस्थाओं का भी सहयोग लिया जा रहा है। बच्चों की पहचान के लिए स्कूल और आवास की मैपिंग, शिक्षकों की टैगिंग तथा घर-घर सर्वेक्षण जैसे उपाय अपनाए गए हैं।

पहचान और निगरानी की प्रक्रिया को दहर पोर्टल के माध्यम से डिजिटल रूप दिया गया है। विद्या समीक्षक केंद्र के टोल-फ्री नंबर, ऑनलाइन सूचना व्यवस्था और यू-डायस में दर्ज सूचनाओं के आधार पर भी बच्चों का सत्यापन किया जा रहा है। विभाग 15 से 18 वर्ष के बच्चों को राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान से जोड़ने की तैयारी कर रहा है।

ईंट-भट्ठों, निर्माण स्थलों, रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों जैसे क्षेत्रों में भी स्कूल से बाहर बच्चों की तलाश की जा रही है। सर्वेक्षण में तीन से पांच वर्ष आयु वर्ग के 10,133 बच्चे भी चिन्हित हुए हैं। इनके आंगनबाड़ी नामांकन के लिए जिला समाज कल्याण पदाधिकारियों के साथ समन्वय किया जा रहा है। विशेष प्रशिक्षण केंद्रों और नामांकन अभियानों को भी इस प्रयास में शामिल किया गया है।