धनबाद में झारखंड के 10 चिकित्सा संगठनों ने संयुक्त रूप से अपनी छह सूत्री मांगों को लेकर चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की है। संगठनों ने चेतावनी दी है कि मांगें पूरी नहीं होने पर 22 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार शुरू किया जाएगा। प्रस्तावित आंदोलन के दौरान आपातकालीन सेवाएं चालू रखने की बात कही गई है।
धनबाद क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की झारखंड इकाई के अध्यक्ष डॉ. एके सिंह ने आंदोलन की रूपरेखा रखी। ज्वाइंट मेडिकल मूवमेंट के तहत आईएमए के साथ एएचपीआई, झासा, फाइमा और आईडीए समेत कुल 10 संगठन एक मंच पर आए हैं। प्रेस वार्ता में सचिव डॉ. राकेश इंदर और डॉ. प्रणय पूर्वे भी मौजूद थे।
संगठनों की प्रमुख मांगों में चिकित्सकों की सुरक्षा के लिए मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट को सख्ती से लागू करना और क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट में संशोधन करना शामिल है। आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत समय पर प्री-अप्रूवल, उचित पैकेज और बकाया भुगतान सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई गई है।
इसके अलावा सरकारी अस्पतालों के रिक्त पदों पर नियमित भर्ती, मेडिकल विद्यार्थियों की समस्याओं का शीघ्र समाधान और लाइसेंस प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए सिंगल-विंडो व्यवस्था लागू करने की मांग की गई है। संगठन का कहना है कि यह आंदोलन चिकित्सकों के मुद्दों के साथ मरीजों को सुरक्षित, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने से भी जुड़ा है।
घोषित कार्यक्रम के अनुसार चिकित्सक 13 से 20 अक्टूबर तक काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराएंगे। 14 अक्टूबर को प्रेस वार्ता के बाद उपायुक्त को ज्ञापन देने और 15 से 20 अक्टूबर तक जिलों में बैनर-पोस्टर, नुक्कड़ नाटक तथा जन-जागरूकता अभियान चलाने की रूपरेखा भी बनाई गई है।
आंदोलन के अगले चरण में 21 अक्टूबर को एक दिन का सांकेतिक कार्य बहिष्कार प्रस्तावित है। संगठनों ने कहा है कि इसके बाद भी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो 22 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार किया जाएगा। इस घोषणा के कारण नियमित स्वास्थ्य सेवाओं पर संभावित असर को लेकर मरीजों की निगाह अब सरकार और चिकित्सा संगठनों के अगले कदम पर रहेगी।