पश्चिमी सिंहभूम में त्योहारी सीजन के दौरान मिलावटी और असुरक्षित खाद्य पदार्थों की बिक्री रोकने के लिए खाद्य सुरक्षा जांच तेज करने का निर्देश दिया गया है। जिला समाहरणालय में उपायुक्त मनीष कुमार की अध्यक्षता में हुई जिला स्तरीय परामर्शी समिति की बैठक में अब तक की कार्रवाई और आगे की कार्ययोजना की समीक्षा की गई।
बैठक में खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी ने बताया कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत चालू वित्तीय वर्ष में जिले के विभिन्न खाद्य प्रतिष्ठानों में कुल 225 निरीक्षण किए गए हैं। जांच के दौरान खाद्य पदार्थों के 48 नमूने भी संग्रहित किए गए। इन नमूनों की जांच के साथ प्रतिष्ठानों में निर्धारित मानकों के अनुपालन की स्थिति पर चर्चा हुई।
समीक्षा में सामने आया कि खाद्य सुरक्षा से जुड़े चार मामले अपर समाहर्ता-सह-न्याय निर्णयन पदाधिकारी के न्यायालय में दायर किए गए। इन मामलों में कुल 40 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया है। अधिनियम की धारा 69 के तहत 14 खाद्य कारोबारियों पर अलग से कुल 38 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। इस तरह अब तक अर्थदंड की कुल राशि 78 हजार रुपये बताई गई है।
उपायुक्त ने जिले के खाद्य प्रतिष्ठानों में नियमित और सघन निरीक्षण अभियान चलाने को कहा। संदिग्ध खाद्य पदार्थों के नमूने लेकर उनकी जांच कराने तथा सामने आने वाली अनियमितताओं पर समयबद्ध ढंग से कार्रवाई सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया गया। बैठक में पनीर की गुणवत्ता की जांच पर विशेष ध्यान देने की बात कही गई।
प्रशासन ने खाद्य कारोबारियों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने और नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों के विरुद्ध नियमानुसार कदम जारी रखने पर जोर दिया। अधिकारियों से कहा गया कि मिलावटी या असुरक्षित खाद्य सामग्री की बिक्री रोकने के लिए निरीक्षण और जांच प्रक्रिया को प्रभावी बनाया जाए तथा आम लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए।
बैठक में सिविल सर्जन डॉ. मीना कलुण्डिया, अपर उपायुक्त किस्टो कुमार बेसरा, खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी और अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे। समिति ने जिले में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, पूर्व में की गई कार्रवाई और आगामी जांच अभियान के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की।