झारखंड के 12 जिलों में 50 से अधिक सामुदायिक पुस्तकालय चला रहे संजय कच्छप

जमशेदपुर के सरकारी कर्मचारी संजय कच्छप की 2008 में चाईबासा से शुरू हुई पहल अब ग्रामीण विद्यार्थियों के लिए पुस्तकालय, डिजिटल संसाधन और मार्गदर्शन उपलब्ध करा रही है।

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झारखंड में सामुदायिक पुस्तकालय अभियान चला रहे संजय कच्छप

जमशेदपुर में कार्यरत सरकारी कर्मचारी संजय कच्छप ने गांवों तक किताबें पहुंचाने की अपनी पहल को सामुदायिक अभियान में बदल दिया है। कृषि विभाग में मार्केटिंग सचिव के पद पर कार्यरत कच्छप करीब 18 वर्षों से ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा दे रहे हैं। इस प्रयास के तहत झारखंड के 12 जिलों में 50 से अधिक सामुदायिक पुस्तकालय संचालित हो रहे हैं।

अभियान की शुरुआत 2 अक्टूबर 2008 को चाईबासा के वार्ड संख्या एक स्थित पुलहातु से हुई थी। कच्छप ने वहां पड़ोस के लोगों के लिए पुस्तकालय शुरू किया। आरंभिक दौर में दोस्तों और स्थानीय निवासियों ने सहयोग दिया। बाद में यही व्यवस्था आसपास के क्षेत्रों तक पहुंची। अकेले कोल्हान में करीब 40 सामुदायिक पुस्तकालय स्थापित किए गए हैं।

इन केंद्रों में किताबें उपलब्ध कराने के साथ विद्यार्थियों को डिजिटल संसाधन, करियर संबंधी मार्गदर्शन और नेतृत्व विकास के अवसर भी दिए जाते हैं। स्कूल और कॉलेज के छात्र यहां पढ़ते हैं, जबकि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं को भी अध्ययन की जगह मिलती है। वरिष्ठ विद्यार्थी छोटे बच्चों को पढ़ाई में सहायता करते हैं, जिससे पुस्तकालय सामुदायिक ज्ञान केंद्र के रूप में विकसित हो रहे हैं।

दूरदराज के गांवों तक पुस्तकें पहुंचाने के लिए कच्छप ने 2015 में अपनी कार को मोबाइल पुस्तकालय में बदल दिया था। वह वाहन से किताबें लेकर गांवों में जाते और लोगों को पढ़ने के लिए प्रेरित करते थे। अब इस काम में एक नए वाहन का इस्तेमाल किया जा रहा है। अभियान को आगे बढ़ाने के लिए ग्रामसभाओं को भी जोड़ा जा रहा है।

पुस्तकालयों के संचालन में शिक्षक, विद्यार्थी, सरकारी कर्मचारी, सामाजिक कार्यकर्ता, व्यवसायी और ग्रामीण किताबें, फर्नीचर तथा डिजिटल उपकरण देकर सहयोग करते हैं। टाटा स्टील फाउंडेशन ने कंप्यूटर और प्रिंटर उपलब्ध कराए हैं। जिला प्रशासन की सहायता से कुछ सामुदायिक भवनों को भी पुस्तकालयों के रूप में विकसित किया गया है।

अलग-अलग स्थानों पर चल रहे पुस्तकालयों को ‘डिजिटल लाइब्रेरी ग्रुप झारखंड’ नामक व्हाट्सऐप नेटवर्क से जोड़ा गया है, जहां संचालक संसाधन और सूचनाएं साझा करते हैं। रोजगार पा चुके कई पूर्व सदस्य अब पुस्तकें, मार्गदर्शन और समय देकर अभियान से दोबारा जुड़ रहे हैं। कुछ सदस्य नए पुस्तकालय स्थापित करने में भी मदद कर रहे हैं।