झारखंड के 19 जिलों में वित्त रहित संस्थानों का अनुदान लंबित, तीन दिन में भुगतान का निर्देश

शिक्षा विभाग ने 19 जिलों के जिला शिक्षा पदाधिकारियों को स्वीकृत अनुदान तीन दिनों में संस्थानों के खातों में भेजने को कहा है। अनुपालन नहीं होने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

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रांची स्थित झारखंड स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग से संबंधित प्रतीकात्मक दृश्य

रांची में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने वित्त रहित स्कूलों, कॉलेजों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों के अनुदान वितरण में देरी पर नाराजगी जताई है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए स्वीकृत राशि राज्य के 19 जिलों में अब तक संबंधित संस्थानों के खातों में नहीं पहुंची है। विभाग ने इन जिलों के जिला शिक्षा पदाधिकारियों को तीन दिनों के भीतर भुगतान पूरा करने का निर्देश दिया है।

विभागीय अनुदान समिति ने अपील आवेदनों के आधार पर यह राशि स्वीकृत की थी। उपलब्ध विवरण के अनुसार, छह अक्टूबर को ही जिलों को धन उपलब्ध करा दिया गया था और 15 अक्टूबर तक संस्थानों को भुगतान करने को कहा गया था। निर्देश में यह भी स्पष्ट किया गया था कि वितरण में देरी को गंभीरता से लिया जाएगा।

इसके बावजूद केवल रामगढ़, हजारीबाग, सिमडेगा, धनबाद और पूर्वी सिंहभूम में स्वीकृत राशि संस्थानों के खातों में हस्तांतरित की गई। शेष 19 जिलों में वितरण लंबित रहने की जानकारी सामने आने के बाद माध्यमिक शिक्षा निदेशक राजेश प्रसाद ने संबंधित जिला शिक्षा पदाधिकारियों को पत्र भेजा। पत्र में देरी को विभागीय आदेश की अवहेलना बताया गया है।

विभाग ने कहा है कि राशि अगले तीन दिनों में वितरित की जाए। निर्धारित अवधि में निर्देश का पालन नहीं होने पर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। भुगतान की समयसीमा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि संस्थानों को उपयोगिता प्रमाणपत्र के साथ वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए आवेदन करना है।

मामला बुधवार को वित्त रहित शिक्षा संघर्ष मोर्चा के पदाधिकारियों ने विभागीय सचिव उमाशंकर सिंह के संज्ञान में रखा था। संगठन ने अनुदान में 75 प्रतिशत वृद्धि और वित्त रहित संस्थानों की छात्राओं को सावित्रीबाई फुले बालिका समृद्धि योजना का लाभ देने की मांग भी उठाई।

इन मांगों पर विभागीय सचिव ने कहा कि सरकार की ओर से दिए गए आश्वासन को पूरा किया जाएगा, हालांकि इसके लिए कुछ नीतिगत निर्णय आवश्यक हैं। फिलहाल विभाग का तात्कालिक जोर पहले से स्वीकृत अनुदान को लंबित रखने वाले जिलों में भुगतान सुनिश्चित कराने पर है।