झारखंड के 35 लाख घरों में पाइप से जलापूर्ति, राष्ट्रीय औसत से अब भी पीछे राज्य

राज्य में 55.89 प्रतिशत घरों तक नल से जल पहुंचने का दावा किया गया है, जबकि राष्ट्रीय औसत 82.47 प्रतिशत है। अगले दो वर्षों में 65 लाख घरों को पाइप कनेक्शन देने का लक्ष्य रखा गया है।

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झारखंड में नल से पेयजल आपूर्ति व्यवस्था का प्रतीकात्मक दृश्य

रांची में उपलब्ध विभागीय जानकारी के अनुसार, झारखंड के करीब 35 लाख घरों तक अब पाइप कनेक्शन से पेयजल पहुंच रहा है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जल जीवन मिशन तथा राज्य सरकार की योजनाओं के माध्यम से यह व्यवस्था बढ़ाई गई है। इसके बावजूद नल से जल की उपलब्धता में राज्य राष्ट्रीय औसत से पीछे बना हुआ है।

आंकड़ों के मुताबिक, झारखंड में अभी 55.89 प्रतिशत घरों को नल से जल मिल रहा है, जबकि राष्ट्रीय औसत 82.47 प्रतिशत बताया गया है। पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने अगले दो वर्षों में 65 लाख घरों तक पाइप कनेक्शन पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। विभागीय मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने शुद्ध पेयजल की उपलब्धता को सरकार की प्राथमिकता बताया है।

राज्य गठन के समय बड़ी आबादी पेयजल के लिए नदी, तालाब और कुओं जैसे स्रोतों पर निर्भर थी। अब पाइप कनेक्शन के अलावा दो करोड़ से अधिक लोगों को सामुदायिक जलापूर्ति योजनाओं से पानी मिलने की बात कही गई है। चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. ऋषिकेश झा के अनुसार, सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता बढ़ने के साथ अशुद्ध पानी से बीमार पड़ने वालों की संख्या में 75 प्रतिशत तक कमी आई है।

पठारी भूभाग के कारण झारखंड में बारिश का बड़ा हिस्सा बहकर बाहर चला जाता है। रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले दस वर्षों में सात हजार नए तालाब और कई चेकडैम बनाए गए हैं। अगले पांच वर्षों में कुल वर्षा जल का 40 प्रतिशत संरक्षित करने का प्रयास है। पर्यावरणविद नीतीश प्रियदर्शी ने आवासीय क्षेत्रों में वर्षा जल संरक्षण के लिए विशेष अभियान की जरूरत बताई है।

राज्य के लगभग 30 प्रतिशत क्षेत्र में फ्लोराइड, आर्सेनिक और आयरन मिश्रित पानी की समस्या बताई गई है। इसकी जांच के लिए जिलों में प्रयोगशालाएं कार्यरत हैं और उन्हें एनएबीएल मानकों के अनुरूप उन्नत करने का लक्ष्य है। जल सहियाओं को जांच किट देने के साथ जलस्रोतों की देखरेख और मरम्मत का तकनीकी प्रशिक्षण भी दिया गया है।

झारखंड में 29,756 जल सहिया जलस्रोतों के रखरखाव, स्वच्छता और शुल्क संग्रह जैसे कार्यों से जुड़ी हैं। विभाग के सामने अब पाइप कनेक्शन का दायरा बढ़ाने के साथ पानी की गुणवत्ता, वर्षा जल संरक्षण और मौजूदा जलापूर्ति ढांचे के नियमित रखरखाव की चुनौती है। निर्धारित लक्ष्य पूरे होने पर अधिक परिवारों की सुरक्षित पेयजल तक सीधी पहुंच बन सकेगी।