झारखंड के 79 नए और छूटे 33 केवी फीडरों पर लगेंगे एबीटी मीटर

जेबीवीएनएल ने 79 एबीटी मीटरों की आपूर्ति, स्थापना और पांच वर्ष के रखरखाव के लिए ई-टेंडर जारी किया है। इससे फीडर स्तर पर बिजली का लेखा-जोखा बेहतर होने की उम्मीद है।

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रांची। झारखंड में बिजली की खरीद, आपूर्ति और ऊर्जा प्रवाह का अधिक सटीक हिसाब तैयार करने के लिए 33 केवी के नए और अब तक छूटे फीडरों पर एबीटी मीटर लगाए जाएंगे। झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड ने ऐसे 79 मीटरों की आपूर्ति, स्थापना और कमीशनिंग के लिए ई-टेंडर जारी किया है। चयनित एजेंसी को पांच वर्ष तक इनका रखरखाव भी करना होगा।

राज्य के करीब 90 प्रतिशत फीडरों पर एबीटी मीटर पहले ही लगाए जा चुके हैं। अब निगम का लक्ष्य शेष तथा नए बनाए जा रहे फीडरों को भी इस व्यवस्था से जोड़ना है, ताकि बिजली की उपलब्धता, खपत और विभिन्न संस्थाओं के बीच होने वाले ऊर्जा आदान-प्रदान का व्यवस्थित रिकॉर्ड तैयार किया जा सके।

प्रस्तावित मीटर रांची, जमशेदपुर, दुमका, मेदिनीनगर, गिरिडीह, धनबाद और हजारीबाग विद्युत आपूर्ति क्षेत्रों में लगाए जाएंगे। इनके लिए 33 केवी के उन इंटरफेस बिंदुओं को चुना गया है, जहां झारखंड ऊर्जा संचरण निगम और बिजली वितरण निगम अथवा दामोदर वैली कॉरपोरेशन और वितरण निगम के बीच बिजली का लेन-देन होता है।

निविदा के दायरे में केवल मीटर लगाना शामिल नहीं है। इसके साथ मीटरिंग यूनिट, जरूरी सहायक उपकरण और एबीटी सॉफ्टवेयर की आपूर्ति भी की जानी है। पांच वर्ष की रखरखाव अवधि का उद्देश्य प्रणाली को नियमित रूप से चालू रखना और दर्ज होने वाले आंकड़ों की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

फीडर स्तर पर मिले आंकड़ों से बिजली के इनपुट और वास्तविक ऊर्जा प्रवाह का मिलान किया जा सकेगा। इससे वितरण निगम को लाइन लॉस की पहचान, बिजली की जरूरत का आकलन, मांग के अनुसार योजना और लागत प्रबंधन में सहायता मिलने की संभावना है। निगम प्रबंधन ने सटीक ऊर्जा लेखांकन के साथ शत-प्रतिशत बिलिंग सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए हैं।

बेहतर ऊर्जा लेखांकन को बिजली प्रबंधन और वित्तीय योजना मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। स्पष्ट आंकड़े उपलब्ध होने से दरों को स्थिर रखने के प्रयासों में मदद मिल सकती है। हालांकि, एबीटी मीटर लग जाने भर से बिजली की दरों में तत्काल कमी या बदलाव सुनिश्चित नहीं होता; इसका प्रत्यक्ष उद्देश्य विश्वसनीय आंकड़े जुटाकर वितरण व्यवस्था का हिसाब अधिक सटीक बनाना है।