झारखंड के 86% सरकारी स्कूलों में स्मार्ट क्लास नहीं, पीजीआई 2.0 रिपोर्ट में खुलासा

पीजीआई 2.0 की जिला स्तरीय रिपोर्ट के अनुसार झारखंड के केवल 14.02% सरकारी स्कूलों में स्मार्ट क्लास है, जबकि उच्च प्राथमिक और उससे ऊपर के 36.39% स्कूलों में आईसीटी लैब उपलब्ध है।

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झारखंड के सरकारी स्कूलों में स्मार्ट क्लास और आईसीटी लैब की उपलब्धता पर रिपोर्ट

जमशेदपुर: झारखंड के सरकारी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा का बुनियादी ढांचा अभी सीमित है। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की पीजीआई 2.0 जिला स्तरीय रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के 44,378 स्कूलों में से 6,223 में ही स्मार्ट क्लास उपलब्ध है। इस हिसाब से 14.02 प्रतिशत स्कूल इस सुविधा से जुड़े हैं, जबकि करीब 86 प्रतिशत स्कूलों में स्मार्ट क्लास नहीं है।

आईसीटी लैब के आंकड़े भी बड़ा अंतर दिखाते हैं। उच्च प्राथमिक और उससे ऊपर की कक्षाओं वाले 15,212 सरकारी स्कूलों में 5,536 के पास आईसीटी लैब है। यह कुल संबंधित स्कूलों का 36.39 प्रतिशत है। यानी लगभग 64 प्रतिशत ऐसे स्कूल अभी इस सुविधा के दायरे से बाहर हैं।

स्मार्ट क्लास कवरेज में रामगढ़ 22.9 प्रतिशत के साथ जिलों में सबसे आगे है। बोकारो में यह आंकड़ा 21.8 प्रतिशत, कोडरमा में 19.5 प्रतिशत और पूर्वी सिंहभूम में 19 प्रतिशत है। दूसरी ओर लातेहार के 8.9 प्रतिशत और पलामू के 9.2 प्रतिशत स्कूलों में स्मार्ट क्लास उपलब्ध है। चतरा, सरायकेला-खरसावां और पश्चिमी सिंहभूम में कवरेज क्रमशः 10.6, 10.4 और 10.8 प्रतिशत दर्ज किया गया है।

आईसीटी लैब की उपलब्धता में गढ़वा 62.9 प्रतिशत के साथ पहले स्थान पर है। रामगढ़ में 58.5 प्रतिशत, लोहरदगा में 53.6 प्रतिशत, देवघर में 53.2 प्रतिशत और कोडरमा में 50.6 प्रतिशत सरकारी स्कूल इस सुविधा से जुड़े हैं। पूर्वी सिंहभूम में आईसीटी लैब का कवरेज 40.7 प्रतिशत है।

पलामू में आईसीटी लैब की उपलब्धता 25.5 प्रतिशत बताई गई है, जो रिपोर्ट में दर्ज जिलावार स्थिति में सबसे कमजोर है। इस प्रकार जिले में स्मार्ट क्लास और आईसीटी लैब, दोनों स्तरों पर डिजिटल संसाधनों की पहुंच अपेक्षाकृत कम दिखाई देती है।

रिपोर्ट में स्मार्ट क्लास को कम प्रदर्शन वाले महत्वपूर्ण संकेतकों में रखा गया है। वर्ष 2026-27 तक स्मार्ट क्लास कवरेज 48.4 प्रतिशत और आईसीटी लैब कवरेज 61.60 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित है। प्लान एंड एक्ट संकेतकों के तहत मौजूदा अंतर कम करने पर जोर दिया गया है।