झारखंड के विश्वविद्यालय शिक्षकों को अकादमिक ग्रेड पे (एजीपी) और उससे जुड़े वित्तीय लाभ पात्रता हासिल करने की तारीख से मिलने का रास्ता साफ हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की विशेष अनुमति याचिका खारिज करते हुए झारखंड हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। मामले पर पांच अक्टूबर को जस्टिस केवी विश्वनाथन और जस्टिस अरुण पल्ली की पीठ ने सुनवाई की।
विवाद राज्य में यूजीसी नियम-2010 लागू करने और शिक्षकों को उसके अनुरूप वित्तीय लाभ देने की तारीख से जुड़ा था। राज्य सरकार ने संबंधित नियमावली की अधिसूचना 15 दिसंबर 2022 को जारी की थी। इसके बाद वित्तीय लाभ भी इसी तारीख से देने की शर्त रखी गई, जबकि शिक्षक अपनी पात्रता की वास्तविक तारीख से लाभ मांग रहे थे।
सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय, दुमका के शिक्षक डॉ. कलानंद ठाकुर और अन्य ने सरकार के निर्णय को झारखंड हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने 17 मई 2024 को दिए फैसले में 15 दिसंबर 2022 से ही वित्तीय लाभ देने वाली शर्त को रद्द कर दिया था। अदालत ने पात्र शिक्षकों के मामलों की प्रक्रिया आदेश की प्रति मिलने के चार महीने के भीतर पूरी करने को कहा था।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में इस अंतर पर भी विचार किया था कि पेंशनरों को एक अप्रैल 2010 से वित्तीय लाभ दिया गया, जबकि सेवारत शिक्षकों के लिए 15 दिसंबर 2022 की तारीख निर्धारित की गई। अदालत के अनुसार, समान श्रेणी के कर्मचारियों के लिए लाभ की अलग-अलग तारीख तय करने के पीछे ठोस और तर्कसंगत आधार होना चाहिए।
राज्य सरकार को हाईकोर्ट की खंडपीठ से भी राहत नहीं मिली थी। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां सरकार की याचिका खारिज कर दी गई। परिणामस्वरूप शिक्षकों का एजीपी लाभ केवल अधिसूचना जारी होने की तारीख से सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उनकी पात्रता की तारीख से निर्धारित होगा।
उपलब्ध विवरण के अनुसार, इस निर्णय से राज्य के करीब एक हजार विश्वविद्यालय शिक्षकों को लाभ मिलने की संभावना है। पात्रता की अलग-अलग तारीखों और देय वित्तीय लाभ की गणना संबंधित शिक्षकों के मामलों की प्रक्रिया के आधार पर होगी।