झारखंड पुलिस में सोशल मीडिया टेकडाउन के लिए सीआईडी आईजी बने नोडल अधिकारी

डिजिटल प्लेटफॉर्म से कानून का उल्लंघन करने वाली सामग्री हटाने की प्रक्रिया के लिए सीआईडी के पुलिस महानिरीक्षक (संगठित अपराध) को अधिकृत किया गया है।

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झारखंड पुलिस ने सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कानून का उल्लंघन करने वाली सामग्री हटाने से संबंधित प्रक्रिया के लिए अधिकृत अधिकारी तय कर दिया है। सीआईडी के पुलिस महानिरीक्षक (संगठित अपराध) को इस काम के लिए नोडल अधिकारी नामित किया गया है। नई व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू होगी और अगला आदेश आने तक प्रभावी रहेगी।

जारी आदेश के मुताबिक, नोडल अधिकारी सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 79(3)(बी) और उसके तहत बनाए गए नियमों में परिभाषित संबंधित मध्यस्थों को टेकडाउन नोटिस जारी कर सकेंगे। मध्यस्थों में वे डिजिटल मंच आते हैं जिनके माध्यम से ऑनलाइन सामग्री उपलब्ध कराई जाती है।

यह आदेश पुलिस महानिरीक्षक, सीआईडी, रांची के पूर्व आदेश में संशोधन करते हुए जारी किया गया है। झारखंड सरकार के गृह, कारागार एवं आपदा प्रबंधन विभाग की अधिसूचना के तहत सीआईडी को पहले ही उक्त धारा के अंतर्गत एजेंसी के रूप में नामित किया गया था। अब विभाग के भीतर नोटिस जारी करने की जिम्मेदारी भी स्पष्ट कर दी गई है।

संशोधित व्यवस्था में पुलिस प्रशासन की ओर से किसी सामग्री को हटाने का निर्देश जारी करने से पहले डीआईजी या उससे ऊपर के रैंक के अधिकारी की अनुमति अनिवार्य होगी। इसके बाद अधिकृत नोडल अधिकारी संबंधित डिजिटल मध्यस्थ को टेकडाउन नोटिस भेज सकेंगे।

इस प्रशासनिक बदलाव से डिजिटल सामग्री हटाने के निर्देशों की प्रक्रिया, जिम्मेदारी और अधिकार-क्षेत्र तय हो गया है। आदेश का दायरा आपत्तिजनक अथवा कानून का उल्लंघन करने वाली बताई गई सामग्री से संबंधित कार्रवाई तक है। उपलब्ध विवरण में किसी खास पोस्ट, खाते या डिजिटल मंच के विरुद्ध कार्रवाई का उल्लेख नहीं किया गया है।