रांची में विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण को लेकर हुई बैठक में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को नो-मैपिंग और अन्य विसंगतियों से जुड़ा बूथवार डेटा उपलब्ध कराया। यह जानकारी पेनड्राइव के माध्यम से साझा की गई, ताकि संबंधित मतदाताओं तक समय रहते पहुंच बनाई जा सके।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के अनुसार, मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने या विवरण सुधारने के लिए दावा-आपत्ति दर्ज कराने की अंतिम तारीख 30 सितंबर है। फॉर्म 6, फॉर्म 7 और फॉर्म 8 के आवेदन भी इसी तारीख तक स्वीकार किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि निर्वाचन आयोग समयसीमा दो बार बढ़ा चुका है और फिलहाल इसे आगे बढ़ाने पर विचार नहीं है।
राजनीतिक दलों से कहा गया कि वे बूथवार सूची अपने बीएलए और बीएलए-2 के साथ समय पर साझा करें। सूची में ऐसे मतदाता शामिल हैं, जिन्हें विभिन्न विसंगतियों या पिछले पुनरीक्षण से संबंधित नो-मैपिंग के कारण नोटिस जारी किए गए थे। कई मतदाता सुनवाई के दौरान आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत कर चुके हैं।
कुछ मतदाताओं का नाम 2024 की सूची में था और उन्होंने गणना प्रपत्र भी भरा, लेकिन वे नोटिस की सुनवाई में उपस्थित नहीं हो सके। ऐसे लोगों की पहचान के लिए आउटरीच कार्यक्रम और विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे। संबंधित निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी उपलब्ध दस्तावेजों और वास्तविक स्थिति के सत्यापन के आधार पर नियमानुसार निर्णय करेंगे।
सोमवार तक राज्य में फॉर्म 6 के करीब 6.32 लाख, फॉर्म 7 के 11,732 और फॉर्म 8 के लगभग 4.27 लाख आवेदन मिलने की जानकारी दी गई। पांच अगस्त को जारी प्रारूप सूची में 43.61 लाख नाम हटाए गए थे। पुनरीक्षण से पहले झारखंड में 2.64 करोड़ मतदाता थे, जबकि प्रारूप सूची में यह संख्या 2.21 करोड़ दर्ज की गई। संशोधित मतदाता सूची का प्रकाशन 19 अक्टूबर को प्रस्तावित है।
बैठक में विशेष रूप से पीवीटीजी समुदायों, दिव्यांगजन, जनजातीय समूहों, बुजुर्ग मतदाताओं और उन लोगों पर ध्यान देने को कहा गया जिनके माता-पिता से संबंधित विवरण उपलब्ध नहीं हैं। राजनीतिक दलों से पात्र नागरिकों की पहचान करने और उन्हें प्रक्रिया की जानकारी देने में सहयोग मांगा गया, ताकि किसी योग्य भारतीय नागरिक का नाम मतदाता सूची से वंचित न रहे।