झारखंड में ओबीसी नॉन-क्रीमी लेयर प्रमाणपत्र धारकों को अब हर वर्ष नया प्रमाणपत्र बनवाने की जरूरत नहीं होगी। राज्य सरकार के निर्णय के अनुसार, निर्धारित स्व-घोषणा पत्र जमा करने पर पहले से जारी एनसीएल प्रमाणपत्र को आगामी नियोजन और नामांकन प्रक्रिया में स्वीकार किया जा सकेगा।
इस व्यवस्था का उल्लेख कार्मिक विभाग के एक अक्टूबर 2026 के पत्र और झारखंड राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के 29 अक्टूबर 2026 के पत्र में किया गया है। आदेश की संबंधित कंडिकाओं के तहत अभ्यर्थी को फॉर्म-15 में नॉन-क्रीमी लेयर की स्थिति से जुड़ी स्व-घोषणा देनी होगी। इसके साथ पूर्व में जारी प्रमाणपत्र अथवा नया प्रमाणपत्र मान्य रहेगा।
बदली व्यवस्था का सीधा संबंध सरकारी नियोजन और शैक्षणिक नामांकन प्रक्रियाओं से है। अब तक प्रमाणपत्र की सीमित वैधता के कारण विद्यार्थियों और नौकरी के अभ्यर्थियों को अलग-अलग प्रवेश या भर्ती चक्र में नया दस्तावेज बनवाना पड़ता था। नई प्रक्रिया से प्रमाणपत्र दोबारा बनवाने में लगने वाले समय, खर्च और प्रशासनिक देरी से राहत मिलने की उम्मीद है।
राष्ट्रीय ओबीसी मोर्चा के झारखंड अध्यक्ष राजेश कुमार गुप्ता ने निर्णय का स्वागत किया है। उनके अनुसार, संगठन लंबे समय से राज्य सरकार और पिछड़ा वर्ग आयोग के समक्ष वार्षिक नवीनीकरण की बाध्यता समाप्त करने की मांग उठा रहा था। उन्होंने कहा कि एक वर्ष की वैधता वाली व्यवस्था से छात्रों और अभ्यर्थियों को नियोजन तथा नामांकन के दौरान परेशानी होती थी।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पिछड़ा वर्ग आयोग ने 26 मई 2026 की बैठक में इस विषय पर अनुशंसा की थी। इसके बाद राज्य स्तर पर प्रमाणपत्र संबंधी प्रक्रिया को सरल करने का निर्णय लिया गया। हालांकि पात्रता की पुष्टि के लिए अभ्यर्थियों को निर्धारित प्रारूप में अपनी नॉन-क्रीमी लेयर स्थिति घोषित करनी होगी।
मोर्चा ने केंद्र सरकार से भी केंद्रीय नियोजन और केंद्रीय शिक्षण संस्थानों के लिए ऐसी ही सरल व्यवस्था बनाने की मांग की है। फिलहाल झारखंड का निर्णय राज्य की आगामी भर्ती और नामांकन प्रक्रियाओं पर लागू होने वाली व्यवस्था से संबंधित है। अभ्यर्थियों के लिए फॉर्म-15 की स्व-घोषणा इस प्रक्रिया का आवश्यक हिस्सा रहेगी।