झारखंड में क्लिनिकल इस्टैब्लिशमेंट नियमों में संशोधन की तैयारी, पांच सदस्यीय समिति गठित

स्वास्थ्य विभाग ने डॉ. नेहा अरोड़ा की अध्यक्षता में समिति बनाई है। समिति संगठनों से सुझाव लेकर एक सप्ताह में रिपोर्ट देगी और ऑनलाइन पंजीकरण की परियोजना तैयार करेगी।

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झारखंड में क्लिनिकल इस्टैब्लिशमेंट नियमों के संशोधन के लिए गठित समिति से जुड़ी खबर

रांची में झारखंड सरकार ने क्लिनिकल संस्थानों के पंजीकरण और विनियमन से जुड़े नियमों में बदलाव की दिशा में प्रक्रिया शुरू की है। स्वास्थ्य विभाग ने झारखंड राज्य क्लिनिकल इस्टैब्लिशमेंट (रजिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन) रूल्स, 2013 में संशोधन के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित की है। स्टेट क्लिनिकल इस्टैब्लिशमेंट काउंसिल के गठन से संबंधित अधिसूचना में बदलाव भी प्रस्तावित है।

समिति की अध्यक्षता स्वास्थ्य विभाग की विशेष सचिव डॉ. नेहा अरोड़ा करेंगी। अपर सचिव शशि प्रकाश सिंह और स्वास्थ्य सेवाओं के निदेशक प्रमुख डॉ. सिद्धार्थ सान्याल को सदस्य बनाया गया है। संयुक्त सचिव अनुज कुमार प्रसाद सदस्य सचिव होंगे, जबकि केपीएमजी के प्रतिनिधि विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल किए जाएंगे।

विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार समिति को एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी है। इस रिपोर्ट के आधार पर नियमावली में संशोधन के संबंध में आगे निर्णय लिया जाएगा। समिति विभिन्न संगठनों के साथ विचार-विमर्श करेगी और प्रस्तावित बदलावों पर उनके सुझाव भी प्राप्त करेगी।

समिति को क्लिनिकल संस्थानों के पंजीकरण और विनियमन की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन करने के लिए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन तैयार करने की जिम्मेदारी भी दी गई है। यह प्रतिवेदन विभाग की स्वीकृति के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। ऑनलाइन व्यवस्था का प्रस्ताव लागू होने पर आवेदन और नियमन से जुड़ी प्रक्रियाओं को डिजिटल रूप दिया जा सकेगा।

स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि प्रस्तावित संशोधन और ऑनलाइन प्रणाली से राज्य में क्लिनिकल संस्थानों के पंजीकरण, नियमन तथा निगरानी की व्यवस्था अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने में मदद मिल सकती है। हालांकि नियमों में वास्तविक बदलाव समिति की रिपोर्ट और उसके बाद विभाग के निर्णय पर निर्भर करेगा।

राज्य के चिकित्सक 50 बेड तक के निजी अस्पतालों और क्लिनिकों को क्लिनिकल इस्टैब्लिशमेंट एक्ट से छूट देने की मांग कर रहे हैं। यह मांग चिकित्सकों की ओर से घोषित आंदोलन के मुद्दों में भी शामिल है। गठित समिति इस मांग पर विचार कर सकती है, लेकिन फिलहाल किसी छूट या संशोधन पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।