रांची में राज्य स्तर पर छोटे उद्योगों, आवासीय परियोजनाओं और मार्केटिंग कॉम्प्लेक्स की पर्यावरण संबंधी रिपोर्ट की ग्रीन ऑडिट करने का निर्णय लिया गया है। इसके तहत पर्यावरण स्वीकृति के लिए दी गई जानकारी के साथ परियोजना स्थल पर किए गए कार्यों की भी जांच होगी। मानकों का उल्लंघन या रिपोर्ट में गड़बड़ी मिलने पर संबंधित परियोजना पर जुर्माना लगाया जाएगा।
यह निर्णय प्रदूषण नियंत्रण परिषद की बैठक में सामने आए मामलों के बाद लिया गया। परिषद ने राज्य के कई शहरों में ऐसी गड़बड़ियां पकड़ी हैं, जिनमें पर्यावरण मानकों का उल्लंघन हुआ था। अब परियोजना शुरू होने के साथ पर्यावरण संरक्षण के लिए किए जा रहे कार्यों की प्रगति रिपोर्ट ऑनलाइन जमा कराने का प्रावधान तैयार किया जा रहा है।
ऑनलाइन विवरण की पुष्टि के लिए प्रदूषण जांच करने वाली संस्था के प्रतिनिधि परियोजना स्थल का निरीक्षण करेंगे। मौके की स्थिति का मिलान जमा की गई डिजिटल रिपोर्ट से किया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य परियोजनाओं की ओर से प्रस्तुत दावों और धरातल पर हुए पर्यावरण संबंधी कार्यों के बीच अंतर का पता लगाना है।
मार्केटिंग परियोजनाओं में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट और कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए लगाए गए उपकरणों की सेंसर आधारित निगरानी अनिवार्य की जा रही है। इन परियोजनाओं की स्थिति की राज्य स्तर पर हर महीने समीक्षा करने की व्यवस्था भी होगी। जांच में अनियमितता मिलने पर जुर्माने की कार्रवाई की जाएगी।
राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण पर्यावरण संरक्षण के लिए किए गए कार्यों की जांच करता है। बिना पर्यावरण स्वीकृति काम शुरू करने वाली आवासीय परियोजनाओं और छोटे उद्योगों पर प्राधिकरण जुर्माना लगा सकता है। ऐसे मामलों में परियोजनाओं को जुर्माने के बराबर राशि का पर्यावरण संबंधी काम करके उसकी रिपोर्ट देनी होती है, जिसके बाद अनापत्ति प्रमाणपत्र की प्रक्रिया आगे बढ़ती है।
परिषद की बैठक में यह भी पाया गया कि कुछ निजी एजेंसियां किसी दूसरी परियोजना में हुए काम को दिखाकर अपना दावा पेश कर रही थीं। इस तरह की गड़बड़ी रोकने के लिए प्रत्येक सप्ताह कराए गए कार्य की अलग रिपोर्ट लेने का निर्णय हुआ है। ऑनलाइन रिपोर्टिंग, नियमित समीक्षा और स्थल निरीक्षण को जोड़कर निगरानी व्यवस्था को अधिक जवाबदेह बनाने की तैयारी है।