झारखंड में डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए दक्षिण भारत से पीजी चिकित्सक लाने की तैयारी

स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक में करीब एक हजार पीजी डॉक्टर लाने के प्रयास, सभी जिलों में स्वाइन फ्लू जांच और स्वास्थ्यकर्मियों के प्रशिक्षण पर चर्चा हुई।

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रांची में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक करते अधिकारी

रांची में स्वास्थ्य विभाग और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की समीक्षा बैठक में झारखंड के अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी दूर करने के उपायों पर चर्चा हुई। स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने बताया कि दक्षिण भारत से करीब एक हजार पीजी डॉक्टरों को राज्य में लाने का प्रयास किया जा रहा है। अस्पतालों में चिकित्सकों और पैरामेडिकल कर्मचारियों के पदों का निर्धारण सिविल सर्जनों से मिले सुझावों तथा जरूरत के अनुसार करने की तैयारी है।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हुई बैठक में स्वाइन फ्लू की स्थिति और जांच व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि अभी रांची सदर अस्पताल, रिम्स और जमशेदपुर के एमजीएम में इसकी जांच हो रही है। अपर मुख्य सचिव ने सभी जिलों में जल्द जांच शुरू करने का निर्देश दिया। उन्होंने आरटी-पीसीआर मशीनों, खराब उपकरणों की मरम्मत और जांच किट की उपलब्धता की जानकारी भी मांगी।

जिन स्थानों पर जांच मशीन उपलब्ध नहीं है, वहां तत्काल मांग भेजने को कहा गया है। आवश्यकता पड़ने पर तकनीशियनों और पैथोलॉजिस्ट को रिम्स या सदर अस्पताल में प्रशिक्षण दिलाने का निर्देश भी दिया गया। ट्रूनेट मशीनों की उपलब्धता और उन्हें स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली से जोड़ने की प्रगति की समीक्षा करते हुए जिलों को इस व्यवस्था को पूरी तरह सक्रिय करने को कहा गया।

बैठक में अस्पतालों तथा स्वास्थ्य केंद्रों में सीसीटीवी लगाने की योजना पर भी विचार हुआ। संबंधित एजेंसी को जिलों में जाकर उन महत्वपूर्ण स्थानों की पहचान करने को कहा गया, जहां कैमरों की जरूरत है। इसके अलावा हर विधानसभा क्षेत्र में एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को उन्नत करने के लिए भेजे गए प्रस्तावों और वहां आवश्यक सुविधाएं विकसित करने की स्थिति की समीक्षा की गई।

विभाग ने राज्य के 125 स्थानों पर एचपीएलसी मशीन उपलब्ध कराने की बात कही। सहियाओं को रक्त नमूना लेने और ड्रेसिंग का प्रशिक्षण देने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। प्रत्येक उपकेंद्र के लिए बेहतर शैक्षणिक योग्यता वाली दो सहियाओं का चयन कर उन्हें छह महीने का प्रशिक्षण देने की योजना है। बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कर्मियों को भी प्रशिक्षित करने का प्रस्ताव रखा गया।

बैठक में विशेष सचिव डॉ. नेहा अरोड़ा, अपर सचिव शशि प्रकाश सिंह, संयुक्त सचिव ललित मोहन शुक्ला, विभाग के अन्य अधिकारी और सभी जिलों के सिविल सर्जन शामिल हुए। समीक्षा में डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने के साथ जांच सुविधाओं, प्रशिक्षण, निगरानी और स्वास्थ्य केंद्रों के बुनियादी ढांचे को बेहतर करने पर जोर रहा। हालांकि पीजी डॉक्टरों को लाने और प्रशिक्षण संबंधी पहल अभी विभागीय प्रयास तथा प्रस्ताव के स्तर पर है।