पीएम-एबीएचआईएम के 90.10 करोड़ रुपये खर्च नहीं, 20 जिलों में भुगतान शून्य

झारखंड में पीएम-एबीएचआईएम के लिए आवंटित 125 करोड़ रुपये में से 34.93 करोड़ ही खर्च हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने लंबित भुगतान 15 दिनों में पूरा करने को कहा है।

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झारखंड में पीएम-एबीएचआईएम की आवंटित और खर्च राशि से जुड़ी खबर

झारखंड में प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के तहत उपलब्ध राशि का बड़ा हिस्सा खर्च नहीं हो पाया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की 25 अगस्त 2026 तक की जिला-वार समीक्षा के अनुसार, राज्य को मिले 125 करोड़ रुपये में से 34.93 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं, जबकि 90.10 करोड़ रुपये बैंकों और कोषागारों में पड़े हैं।

समीक्षा में राज्य के 24 में से 20 जिलों में खर्च का आंकड़ा शून्य बताया गया है। इन जिलों के लिए कुल 61.65 करोड़ रुपये आवंटित थे, लेकिन भुगतान जारी नहीं हुआ। उपयोगिता प्रमाणपत्र नहीं मिलने के कारण केंद्र से योजना की अगली किस्त प्राप्त करने में भी परेशानी आने की बात सामने आई है।

शून्य खर्च वाले जिलों में बोकारो, चतरा, देवघर, धनबाद, दुमका, गढ़वा, गिरिडीह, गोड्डा, हजारीबाग, जामताड़ा, खूंटी, कोडरमा, लातेहार, पलामू, पाकुड़, रामगढ़, साहिबगंज, सरायकेला-खरसावां, सिमडेगा और पश्चिमी सिंहभूम शामिल हैं।

राज्य मुख्यालय ने 48.03 करोड़ रुपये के आवंटन में से 31.25 करोड़ रुपये, यानी करीब 65 प्रतिशत खर्च किए हैं। जिलों में रांची का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा, जहां 7.50 करोड़ रुपये में से 3.06 करोड़ रुपये खर्च हुए। लोहरदगा में 16.40 लाख, गुमला में 29.87 लाख और पूर्वी सिंहभूम में 14.77 लाख रुपये खर्च होने की जानकारी दी गई है।

इस मिशन की राशि से प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को मजबूत करने, शहरी आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के लिए चिकित्सा उपकरण एवं दवाएं खरीदने और प्रयोगशालाओं में मुफ्त रक्त जांच तथा एक्स-रे की सुविधा उपलब्ध कराने की योजना थी। भुगतान लंबित रहने से विक्रेताओं और अस्पतालों के बिल भी अटके होने की जानकारी है।

मामले के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों के उपायुक्तों से प्रशासनिक हस्तक्षेप करने को कहा है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने सिविल सर्जनों को 15 दिनों के भीतर लंबित भुगतान पूरा कराने का निर्देश दिया है। तकनीकी बाधा होने पर सिविल सर्जनों को लेखा अधिकारी के रूप में नियमानुसार भुगतान सुनिश्चित करने को कहा गया है।